- जाहिद खान
यादें और यात्राएं दिलों को तरोताजा कर देती हैं। इन यादों और यात्राओं के तजुर्बे बड़े काम के होते हैं। यही वजह है कि यादें, संस्मरण के रूप में और यात्राएं, रिपोर्ताज या निबंध के तौर पर पाठकों के सामने आते रहते हैं। यह किताबें पढ़ी भी खूब जाती हैं। संस्मरण व यात्राओं की एक ऐसी ही किताब 'यांरा से वॉलोंगॉन्ग', लेखक-कथाकार शेर सिंह ने लिखी है।
हिमाचल प्रदेश के छोटे से गांव यांरा, जो साल के छह महीने बर्फ से ढका रहता है, के निवासी शेर सिंह ने अपनी इस किताब में बचपन से लेकर नौजवानी और नौकरी के दौरान हुए तमाम मीठे तजुर्बों को कलमबद्ध किया है। उनकी यादों और यात्राओं का दायरा, देश की चारों दिशाओं से लेकर दूर देश आस्ट्रेलिया तक है। वॉलोंगॉन्ग, आस्ट्रेलिया का एक शहर है।
वॉलोंगॉन्ग के अलावा आस्ट्रेलिया के कुछ और खूबसूरत शहरों, पर्यटक स्थलों का भी किताब में जिक्र मिलता है। लेखक अपनी यात्राओं का सीधा-सीधा ब्यौरा पेश नहीं करता, बल्कि उस क्षेत्र की संस्कृति, रहन-सहन, वेशभूषा और वहां के मूल निवासियों के आचार-विचार भी प्रस्तुत करता है। अपनी बात को कहने का उसका तरीका बेहद सहज और सरल है। लगभग बातचीत के अंदाज में वह अपनी यात्राओं और विविधरंगी अनुभवों को पाठकों के साथ बांटता है। किताब में कहीं भी कृत्रिम बौद्धिकता और ओढ़े हुए विचार नहीं दिखाई देते। लेखक जैसा है और जैसी उसकी सोच है, वह वैसे ही अपनी ईमानदार अभिव्यक्ति करता है।
दूसरे देश, मजहब और उसके मानने वालों के जानिब उसके मन में जो पूर्वाग्रह हैं, वह उन्हें स्वीकारने में संकोच नहीं करता। अपनी इस संकुचित सोच और पूर्वाग्रह की वजह से कई मर्तबा वह शर्मिंदा भी होता है। इस शर्मिंदगी को वह यदि चाहता, तो छिपा सकता था, मगर तारीफ की जाना चाहिए कि उसने उन प्रसंगों और उसके दिलो—दिमाग में उस वक्त जो बातें चल रही थीं, उन्हें ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया है। 'गणेशोत्सव : एक अलग ही परिवेश में', 'लाल किला रेस्टोरेंट', 'मौका और दस्तूर' लेख इसी तरह के विचारों के साथ खत्म होते हैं।
किताब में कुल 25 आलेख या निबंध हैं। जो अलग-अलग शहर या जगह पर बिताए पलों का लेखा-जोखा है। इन छोटे-छोटे लेखों में लेखक ने एक छोटे से वाकये के जरिए पूरे शहर का जैसे किरदार ही बयां कर दिया है। भुवनेश्वर, वेल्लूर, अहमदाबाद, नागपुर, उडुपी, लखनऊ को लेखक की नजर से देखना एक अलग ही अनुभव है।
लेखक चूंकि कथाकार है, लिहाजा लेखों में किस्सागोई का अंदाज भी शामिल है। जिससे ये लेख पढ़ने में रोचक और कहीं-कहीं कहानी का मजा देते हैं। इन लेखों में लेखक ने अपनी ओर से पूरी कोशिश की है कि एक विचार, एक सीख पाठकों तक जरूर पहुंचे। 'यांरा से वॉलोंगॉन्ग' से पाठकों को ज्ञान और मनोरंजन तो मिले ही, वह उन्हें संवेदनशील एवं एक अच्छा नागरिक भी बनाए। किताब को पढ़कर कहा जा सकता है कि लेखक शेर सिंह इस मामले में पूरी तरह से कामयाब हुए हैं।
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