चंडीगढ़। पंजाब में सरकार और प्रदर्शनकारी किसानों के बीच बातचीत दूसरे दिन सोमवार को भी बेनतीजा रही, क्योंकि किसानों ने मांग की कि राज्य सरकार गन्ने का राज्य सुनिश्चित मूल्य (एसएपी) पड़ोसी राज्य हरियाणा के बराबर यानी 358 रुपये प्रति क्विंटल तय करे, जो देश में सबसे ज्यादा है। बैठक में सरकार ने दावा किया कि उत्पादन लागत 350 रुपये प्रति क्विंटल होनी चाहिए, जबकि किसानों ने इसे 392 रुपये आंका।
गन्ने का एसएपी बढ़ाने की अपनी मांग को लेकर किसान 20 अगस्त से जालंधर के पास दिल्ली-अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग सहित रेल की पटरियां जाम कर आंदोलन कर रहे हैं। वे पिछले सप्ताह सरकार द्वारा घोषित 15 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी को पहले ही खारिज कर चुके हैं।
किसानों ने मांग नहीं मानी और सभी हाईवे जाम करने की धमकी दी।
अधिकारियों ने आईएएनएस को बताया कि एक विशेषज्ञ समिति के साथ कृषि नेताओं की एक बैठक हुई और वे किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके।
अब मंगलवार को मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के साथ बैठक होगी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू प्रदर्शन कर रहे किसानों के समर्थन में खुलकर सामने आए और उन्होंने अपनी ही सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पंजाब सरकार हरियाणा और अन्य राज्यों की तुलना में कम सुनिश्चित मूल्य की पेशकश कर रहा है।
सिद्धू ने एक ट्वीट में कहा, "गन्ना किसानों के मुद्दे को तुरंत सौहार्दपूर्ण ढंग से हल करने की जरूरत है। यह अजीब है कि पंजाब में खेती की उच्च लागत के बावजूद हरियाणा, यूपी, उत्तराखंड की तुलना में पंजाब में गन्ने की कीमत बहुत कम है। कृषि के अग्रदूत के रूप में पंजाब का एसएपी बेहतर होना चाहिए!"