• निरंजन की जुर्माने की नौटंकी और सिंधिया के नाम से संचालित मेला की धूमिल होती छवि

    ग्वालियर मैं संचालित कैलाशवासी माधव सिंधिया व्यापार मेला अपने अवस्थाओं के कारण चर्चाओं का विषय रहता है आलम यह है कि साल 10 साल यहां होने वाले गड़बड़ झाला की परिस्थित बढ़ती जा रही है

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    ग्वालियर। ग्वालियर मैं संचालित कैलाशवासी माधव सिंधिया व्यापार मेला अपने अवस्थाओं के कारण चर्चाओं का विषय रहता है आलम यह है कि साल 10 साल यहां होने वाले गड़बड़ झाला की परिस्थित बढ़ती जा रही है अब तो हालत यह है कि मेला अवधि खत्म होने के बाद भी मेले में गोलमाल चलता रहता है। अभी हाल ही में देशबंधु ने समापन के बाद भी चल रहे अवैध मेल या के मुद्दे को उठाया था जिस पर मिला सचिव निरंजन लाल श्रीवास्तव लगातार बेतुका बयान देकर बचने का प्रयास कर रहे हैं।

    मेला समापन अवधि के बाद भी क्यों संचालित है पूछे जाने पर उन्होंने पुलिस के माथे ठीकरा  फोड़ते हुए कहा था कि पुलिस को पत्र लिखने के बावजूद पुलिस दुकानदारों को नहीं हटा रही है। इस मामले में जब निरंजन लाल श्रीवास्तव से मेला प्राधिकरण ने दुकानदारों को हटाने के लिए क्या किया पूछा गया तो उन्होंने बताया कि मेला में जमे हुए 250 व्यापारियों पर ₹1000 प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाया है।
     
    लेकिन यहां मेला प्राधिकरण की साथ गांठ देखिए की जुर्माना तो लगाया है लेकिन 18 दिन बीतने के बाद भी एक दिन का जुर्माना भी वसूला नहीं गया है। यह सब दिखता है कि जुर्माना केवल खाना पूर्ति है, बाद में सेटिंग करके सब व्यवस्था में ले लिया जाएगा।
     
    मेला सचिव निरंजन लाल श्रीवास्तव मेले में चल रही अव्यवस्थाओं पर जिस तरीके से गोलमोल जवाब देते हैं उससे साफ साबित है कि वह मेले की छवि धूमिल करने पर तुले हुए हैं और निरंकुशता का आलम यह है कि उनकी इस लापरवाही पर संज्ञान लेने वाला कोई नहीं। अवैध रूप से संचालित इस मेल से मध्य प्रदेश सरकार को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है क्योंकि यह दुकानदार बिना किसी बल के लगातार व्यापार कर रहे हैं। साथ ही यदि समापन के बाद मेला आदि बढ़कर इन व्यापारियों से नियम अनुसार मेले का दुकान का किराया लिया जाता उससे भी सरकार को राजस्व का लाभ होता। उम्मीद की जा सकती है इस मामले में नियम पूर्वक कार्रवाई करेगा।

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