कोण्डागांव में हुआ अंतिम संस्कार
जोगी, नेताम समेत सैकड़ों हुए शामिल
जगदलपुर ! क्षेत्र के जाने मोने आदिवासी नेता एवं बस्तर के पूर्व सांसद मानकुराम सोढ़ी का कल रात निधन हो गया। श्री सोढ़ी 82 वर्ष के थे। उनका अंतिम संस्कार आज उनके गृहग्राम कोण्डागांव में किया गया। जिसमें बस्तर के जनप्रतिनिधि एवं कांगे्रसी नेताओं के साथ पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरविंद नेताम, छग के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के साथ काफी संख्या में गणमान्य नागरिक शामिल हुये।
प्राप्त जानकारी के अनुसार आदिवासी नेता एवं पूर्व सांसद मानकुराम सोढ़ी को विगत सोमवार गंभीर अवस्था में उपचार हेतु रायपुर के रामकृष्ण केयर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दरम्यान श्री सोढ़ी का मंगलवार को निधन हो गया। वे अपने पीछे तीन पुत्रों और एक पुत्र का भरा पुरा परिवार छोड़ गए हैं। ज्ञात हो कि श्री सोढ़ी 1962 ले लेकर 1984 तक पांच बार विधायक रह चुके थे। अविभाजित मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के केबिनेट में वे आबकारी मंत्री के रूप में भी कार्य कर चुके थे। श्री सोढ़ी इसके उपरांत तीन बार सांसद भी चुने गये थे। उन्हें एक ईमानदार आदिवासी नेता माना जाता था। निर्विवाद और सादगी भरा जीवन जीने वाले मानकुराम सोढ़ी को बस्तर का गांधी भी कहा जाता था। ज्ञात हो कि श्री सोढ़ी मूलत: शिक्षक थे। श्री सोढ़ी प्रधानमंत्री राजीव गांधी से काफी प्रभावित थे। बस्तर में राष्ट्रीय राजमार्ग 16 जो आदिलाबाद तक जाता है, श्री सोढ़ी के प्रयासों से ही घोषित हुआ था। श्री सोढ़ी के निधन से बस्तर को अपूरणीय क्षति पहुंची है। श्री सोढ़ी के निधन पर राजाराम तोड़ेम, मनीष कुंजाम, विजय तिवारी व लखेश्वर बघेल सहित बड़ी संख्या में लोगों ने संवेदना प्रकट की है।
श्री सोढ़ी का पार्थिव शरीर आज सुबह रायपुर से कोण्डागांव लाया गया। पार्थिव शरीर कोण्डागांव के सरगीपाल पारा स्थित उनके निवास में रखा गया। श्री सोढ़ी का दाह संस्कार आज संध्या 4 बजे कोण्डागांव में किया गया। ज्ञात हो कि श्री सोढ़ी कांगे्रस पार्टी के ऐसे नेता थे जिनके व्यक्तिगत प्रयासों से जगदलपुर और कोण्डागांव में कांग्रेस भवन का निर्माण कराया गया था। लेकिन सन् 2013 में कं ांग्रेस पार्टी से जब उनके पुत्र शंकर सोढ़ी को टिकट नहीं दी गई तो वे नाराज हो गए। नाराजगी की वजह कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गंाधी द्वारा दिल्ली में मुलाकात का समय नहीं दिया जाना था। इसके उपरांत श्री सोढ़ी ने कांगे्रस पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। श्री सोढ़ी ने छटवीं अनुसूची आंदोलन के दरम्यान श्री नेताम का समर्थन किया था। इस आंदोलन के बाद उनके जनाधार में थोड़ी कमी आई थी। पहली बार वे भाजपा नेता स्व. बलीराम कश्यप से चुनाव हार गये थे। अन्यथा बस्तर की राजनीति में उन्हें अपराजेय राजनेता माना जाता था। श्री सोढ़ी की मजबूती पकड़ का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि अविभाजित मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री उनकी राय को बेहद गंभीरता से लिया करते थे। कांगे्रस पार्टी से मोह भंग होने के बाद उन्होंने अपना एकाकी समय जगदलपुर शहर के वृन्दावन कालोनी स्थित अपने निजी मकान में गुजारा। उनके सबसे बड़े पुत्र डॉ. गिरधारी सोढ़ी शासकीय सेवा में है जबकि शंकर सोढ़ी प्रदेश के मंत्री भी रह चुके है उनके सबसे छोटे पुत्र धरम सोढ़ी जगदलपुर में उनकी विरासत संभाल रहे है।