ग्वालियर: मध्य प्रदेश में तमाम निजी बस सरकारी यूनिवर्सिटी में जीवाजी यूनिवर्सिटी की अपनी एक अलग पहचान है यही एकमात्र यूनिवर्सिटी है जिसे नेक A++ ग्रेड मिला है। इसके अलावा और भी कई अनियमिताओं को लेकर भी यह यूनिवर्सिटी अपनी पहचान रखती है। ताजा मामला परीक्षाओं से संबंधित ही है। परीक्षा में उपयोग की जाने वाली उत्तर पुस्तिकाएं कॉपियों को लेकर यह शिकायत की गई है की परीक्षा में छात्रों को कम ब्राइटनेस की घटिया गुणवत्ता की कॉपियां दी गई। पिछले सत्र में जब घटिया कॉपियां पर परीक्षा कराई गई उसकी जांच रिपोर्ट में पाया गया की कॉपियों की ब्राइटनेस 86 होनी चाहिए जबकि जांच में यह ब्राइटनेस 80 आई है।
आपको बता दें कि इस दौरान 23 लाख कॉपियां खापा दी गई हैं और जांच की माने तो 21 लाख कॉपियों के कागज की ब्राइटनेस ते मापदंड से कम थी इस मामले में जब देशबंधु संवाददाता ने जीवाजी यूनिवर्सिटी के रजिस्टर अरुण सिंह चौहान से चर्चा की तो वह इस मामले पर गंभीर नजर नहीं आए। उन्होंने कहा की जब कॉपी खरीदी गई तब ब्राइटनेस ना जानते हुए 1 साल बाद जांची गई इसलिए ब्राइटनेस 86 की जगह 80 आई है फिर भी हमने कार्यवाही करते हुए कॉपी विक्रेता को केवल 80% भुगतान किया है 20% भुगतान रोक दिया है और इसकी जांच के लिए तीन सदस्य कमेटी बनाई है। उसकी जांच रिपोर्ट के अनुसार ही आगे कार्यवाही की जाएग।
आपको बता दें कि जीवाजी यूनिवर्सिटी नेक ए प्लस प्लस ग्रेड है अब इतनी अच्छी रैंकिंग के बावजूद भी एक विश्वविद्यालय घटिया स्तर की उत्तर पुस्तिकाओं कॉपियों पर परीक्षा कर रहा है ऐसा लगता है की यूनिवर्सिटी के जिम्मेदार लोग यूनिवर्सिटी की साख पर धब्बा लगाने पर तुले हुए हैं ए प्लस प्लस रैंक वाली यूनिवर्सिटी में इस तरह की घटिया कॉपियों का इस्तेमाल कई सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना होगा की जांच कमेटी कुछ मजबूत रिपोर्ट बनती है और इस मामले में गंभीर कार्यवाही होती है या पहले के मामलों की तरह ही जांच में लीपा पोती की जाती है।