• पुर्तगाल और स्लोवाकिया की राजकीय यात्रा पर जाएंगी राष्ट्रपति मुर्मू, 7 अप्रैल से शुरू होगा दौरा

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 7 से 10 अप्रैल तक पुर्तगाल और स्लोवाकिया की राजकीय यात्रा पर रहेंगी। इन यात्राओं से भारत के दोनों देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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    नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 7 से 10 अप्रैल तक पुर्तगाल और स्लोवाकिया की राजकीय यात्रा पर रहेंगी। इन यात्राओं से भारत के दोनों देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    राष्ट्रपति मुर्मू 7-8 अप्रैल को पुर्तगाल की यात्रा पर रहेंगी। पुर्तगाल के राष्ट्रपति मार्सेलो रेबेलो डी सूसा के निमंत्रण पर यह यात्रा हो रही है।

    यह दौरा ऐतिहासिक महत्व रखता है क्योंकि यह भारत और पुर्तगाल के बीच राजनयिक संबंधों की पुनः स्थापना की 50वीं वर्षगांठ का प्रतीक है।

    पुर्तगाल में किसी भारतीय राष्ट्रपति की पिछली राजकीय यात्रा 1998 में हुई थी। उस वक्त राष्ट्रपति के.आर. नारायणन ने देश का दौरा किया था।

    राष्ट्रपति मुर्मू अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति मार्सेलो रेबेलो डी सूसा के साथ उच्च स्तरीय चर्चा करेंगी। वह पुर्तगाल के प्रधानमंत्री लुइस मोंटेनेग्रो और नेशनल असेंबली (संसद) के अध्यक्ष जोस पेड्रो अगुइर-ब्रैंको के साथ भी बैठक करेंगी।

    इस यात्रा से दोनों देशों के बीच पहले से ही फलते-फूलते संबंधों को नई गति मिलने की उम्मीद है, जिसमें व्यापार, आर्थिक संबंधों और लोगों के बीच आदान-प्रदान का विस्तार शामिल है।

    राष्ट्रपति मुर्मू पुर्तगाल में भारतीय समुदाय के साथ भी बातचीत करेंगी।

    पुर्तगाल की यात्रा के बाद राष्ट्रपति मुर्मू 9 अप्रैल को स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी के निमंत्रण पर वहां जाएंगी।

    यह लगभग तीन दशकों में किसी भारतीय राष्ट्रपति की स्लोवाकिया की पहली यात्रा होगी।

    स्लोवाकिया में राष्ट्रपति मुर्मू राष्ट्रपति पेलेग्रिनी और प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगी। वह स्लोवाक गणराज्य की राष्ट्रीय परिषद के अध्यक्ष रिचर्ड रासी से भी मिलेंगी।

    ये मुलाकातें भारत और स्लोवाकिया के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने और विस्तारित करने पर केंद्रित होंगी, खासकर व्यापार, प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में।

    स्लोवाकिया की दो दिवसीय यात्रा इस बात पर प्रकाश डालती है कि भारत स्लोवाक गणराज्य के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को कितना महत्व देता है। इससे रक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में गहन सहयोग और नई पहलों का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है।

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