• मध्यप्रदेश : सौरभ शर्मा की जमानत मामले में सिंघार बोले - सौरभ तो छोटी मछली है, बाहर बैठे बड़े मगरमच्छ उसे बचाने की चाल चल रहे हैं

    मध्यप्रदेश में लोकायुक्त छापों के बाद चर्चा में आए परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा और उसके दो साथियों को लोकायुक्त की विशेष अदालत की ओर से जमानत दिए जाने के बाद इस मामले में राजनीति तेजी से शुरु हो गई है

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    भोपाल। मध्यप्रदेश में लोकायुक्त छापों के बाद चर्चा में आए परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा और उसके दो साथियों को लोकायुक्त की विशेष अदालत की ओर से जमानत दिए जाने के बाद इस मामले में राजनीति तेजी से शुरु हो गई है।

    विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इससे जुड़ी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अब ये देखना है कि सौरभ शर्मा को बचाने की सरकारी कोशिशें अब क्या रंग दिखाती हैं।

    सिंघार ने एक्स पर पोस्ट किया, ''मैंने शुरू से ही ये आशंका व्यक्त की है, कि अकूत संपत्ति के मालिक पूर्व आरटीओ कांस्टेबल सौरभ शर्मा को सरकार बचा रही है! अब उसे जमानत मिलने से ये बात सही साबित होने लगी। लोकायुक्त ने 62 दिन बाद भी आरोप पत्र दाखिल नहीं किया, जो जमानत का कारण बना। अब यदि ईडी ने भी आरोप पत्र दाखिल नहीं किया, तो सौरभ शर्मा हिरासत से बाहर आ जाएगा। सौरभ शर्मा तो छोटी मछली है, बाहर बैठे बड़े मगरमच्छ उसे बचाने की चाल चल रहे हैं और उसे जमानत मिलना उसी चालबाजी का हिस्सा है। अब आगे देखिए सौरभ को बचाने के लिए सरकारी कोशिशें क्या-क्या रंग दिखाती है!''



    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, ''सौरभ शर्मा को जमानत दिलवाकर लोकायुक्त ने अप्रैल फूल दिवस सेलिब्रेट कर लिया है! यह घटना मप्र में भाजपा और आर्थिक अपराधियों के संबंध प्रबंधन की नई कहानी है!''

    सौरभ शर्मा और उसके दो साथियों को कल लोकायुक्त की विशेष अदालत ने जमानत प्रदान कर दी। हालाकि अन्य जांच एजेंसियों से संबंधित मुकदमों में उन्हें अभी जमानत नहीं मिली है, जिसके चलते आरोपी जेल में ही रहेंगे। लोकायुक्त की विशेष अदालत ने तकनीकी आधार पर सौरभ शर्मा और उसके दो साथियों चेतन सिंह तथा शरद जायसवाल को जमानत प्रदान कर दी। लोकायुक्त पुलिस ने निर्धारित समय सीमा 60 दिन के अंदर आरोपपत्र पेश नहीं किया, जिसके चलते उन्हें जमानत प्रदान कर दी गयी है। इन आरोपियों के खिलाफ आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी मामले दर्ज किए हैं और इनसे संबंधित मामलों में जमानत नहीं मिलने के कारण फिलहाल वे जेल में ही रहेंगे।


    दिसंबर 2024 के तीसरे सप्ताह में लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ शर्मा के ठिकानों पर छापे की कार्रवाई की थी। उस समय करोड़ों रुपयों की संपत्ति संबंधी दस्तावेज, नगदी और गहने आदि मिले थे। इसी दौरान आयकर विभाग ने एक कार से 52 किलो सोना और लगभग दस करोड़ रुपए नगद जप्त किए थे। इन कार्रवाइयों के बाद ईडी ने भी अपनी कार्रवाई प्रारंभ की थी। सौरभ और उसके साथियों को लगभग दो माह पहले गिरफ्तार किया गया था, तब से वे तीनों यहां जेल में हैं।

     

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