• विश्व शांति को फिर खतरा

    मध्य-पूर्व में एक बड़े युद्ध की आहट सुनाई दे रही है। इज़रायल के खिलाफ ईरान ने हमले की न केवल चेतावनी दे दी है बल्कि खुद इज़रायल भी इससे बचाव की तैयारियां कर रहा है। माना जा रहा है कि 12-13 अगस्त तक यह आक्रमण हो सकता है; और जैसा कि कहा जा रहा है, यह भीषण होगा।

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    मध्य-पूर्व में एक बड़े युद्ध की आहट सुनाई दे रही है। इज़रायल के खिलाफ ईरान ने हमले की न केवल चेतावनी दे दी है बल्कि खुद इज़रायल भी इससे बचाव की तैयारियां कर रहा है। माना जा रहा है कि 12-13 अगस्त तक यह आक्रमण हो सकता है; और जैसा कि कहा जा रहा है, यह भीषण होगा। इस लड़ाई के लिये दोनों पक्षों की होती लामबन्दी से भी इसकी कल्पना की जा सकती है। अगर इसे समय रहते न रोका गया तो बड़ी तबाही की सम्भावना से इंकार नहीं किया सकता। हमास के राजनैतिक प्रमुख इस्माईल हानिया और हिजबुल्लाह के टॉप कमांडर फाउद शुकर की हत्या से इज़रायल के विरूद्ध और ईरान का साथ देने के लिये लेबनान, यमन, सीरिया और जॉर्डन आ गये हैं। ईरान ने सीरिया से इज़रायल पर ड्रोन हमले की तैयारी की है। जॉर्डन तथा लेबनान के कई आतंकी संगठन भी इस लड़ाई में ईरान का साथ देने के लिये मोर्चाबन्दी कर रहे हैं। शुक्रवार को जब हानिया को क़तर की राजधानी दोहा में दफ़नाया गया तो क़तर तथा फिलिस्तीनी संगठनों के कई बड़े नेता और कमांडर उपस्थित थे जिन्होंने इस लड़ाई को आगे बढ़ाने का मंसूबा ज़ाहिर किया।


    फिलीस्तीन समर्थक इस्लामिक देशों की एकजुटता को देखकर इज़रायल ने भी अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। उसने अपने नागरिकों को बचाव सम्बन्धी सभी उपाय करने हेतु आगाह किया है। नागरिकों से कहा गया है कि वे अपने बम शेल्टरों को साफ़ रखें ताकि हमला होने की स्थिति में डेढ़ मिनटों में वे उनमें पहुंचकर खुद को सुरक्षित कर लें। उनसे पानी, खाद्य सामग्रियां, आवश्यक दवाओं का स्टॉक रखने को कहा गया है। साथ ही उन्हें बैटरियों वाले टॉर्च खरीदकर रखने को भी कहा गया।


    ईरान के कार्यवाहक विदेश मंत्री अली बाघेरी ने कहा है कि पिछले 10 महीनों से इज़रायल द्वारा गज़ा पट्टी में जो नरसंहार किया गया है और विनाश फैलाया है उसके मद्देनज़र उसे रोकना अब नितांत आवश्यक हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर ऐसा न हुआ तो न सिर्फ पश्चिम एशिया बल्कि विश्व की शांति खतरे में पड़ जायेगी। फाउद शुकर की मौत से नाराज़ हिज़बुल्लाह ने इज़रायल पर कई मिसाइलें दागी थीं जिसे इज़रायल ने हवा में ही नष्ट कर दिया था। इससे साफ है कि ईरान एवं समर्थक देशों में इज़रायल के खिलाफ गुस्सा बढ़ता जा रहा है जिसे नज़रंदाज़ नहीं किया जाना चाहिये। इस नाराज़गी, लड़ाई की तैयारियों एवं दोनों पक्षों की लामबन्दी को देखते हुए शांति के अंतरराष्ट्रीय प्रयास किये जाने अब बेहद ज़रूरी हो गये हैं। समय रहते ऐसा न किया गया तो लड़ाई छिड़ जाने पर उसे बड़े विनाश एवं नरसंहार के पहले रोकना कठिन हो जायेगा। इज़रायल की नाराज़गी तुर्किये के प्रति भी देखने को मिली है जिसने हानिया की मौत पर अपना राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका दिया था। यह उसका ईरान के प्रति समर्थन का तरीका माना गया है।


    हानिया की मौत के लिये इज़रायल की सीक्रेट सर्विस मोसाद को जिम्मेदार माना जा रहा है जिसने प्रमुख लोगों की सुरक्षा के लिये तैनात ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के दो एजेंटों को इस काम के लिये कथित तौर पर सुपारी दी थी। इस हत्या के कारण ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजिश्कियन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उन्हें अपने ही देशवासियों के सामने शर्मिंदगी हो रही है। हालांकि हानिया की मौत के लिये जिम्मेदार मानते हुए पजिश्कियन ने दो दर्जन से ज्यादा आईआरजीसी तथा सीक्रेट सर्विस के अधिकारियों को गिरफ्तार कराया है। हानिया की हत्या जिस गेस्ट हाऊस में हुई थी, उसके कई अधिकारियों की भी गिरफ्तारी कर पजिश्कियन बतलाना चाह रहे हैं कि हानिया की हत्या को उन्होंने गम्भीरता से लिया है। इस लिहाज़ से भी उनके लिये ज़रूरी है कि वह इज़रायल पर बड़ा आक्रमण करें क्योंकि ईरान व उसकी जनता मान कर चल रही है कि फाउद व हानिया की हत्याओं के पीछे इज़रायल का ही हाथ है। वैसे खुद इज़रायल फाउद की हत्या की जिम्मेदारी तो लेता है लेकिन हानिया की मौत की जिम्मेदारी को लेकर न वह इंकार करता है और न ही उसने स्वीकारा है।


    हालांकि ईरान यदि यह आक्रमण करता है तो पजिश्कियन की समस्या ऐसे बढ़ेगी कि उन्होंने यह चुनाव इसी वादे पर जीता था कि वे पश्चिमी देशों के साथ ईरान के सम्बन्ध सुधारेंगे। साफ है कि इज़रायल पर आक्रमण की घोषणा से वे ऐसा करने में नाकाम साबित हो गये हैं क्योंकि पश्चिमी देश इज़रायल के साथ हैं। साफ है कि पहले की ही तरह अमेरिका, फ्रांस, ग्रेट ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया आदि इज़रायल का साथ देंगे। हालांकि अमेरिका की भूमिका पर अलग-अलग तरह की बातें की जा रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने मेरीलैंड एयरबेस पर पत्रकारों को जानकारी दी कि 'उन्होंने इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेत्यनाहू से फोन पर कहा है कि उनके पास युद्ध विराम का मौका है और इस दिशा में उन्हें आगे बढ़ना चाहिये।' दूसरी तरफ यह भी कहा जाता है कि अमेरिका के सैन्य मुख्यालय में इस सम्भावित युद्ध को लेकर विचार चल रहा है। इस आशय की खबरों की पुष्टि नहीं हुई है कि अमेरिका इन दोनों देशों की लड़ाई होने पर इज़रायल की मदद के लिये अपनी सेना भेजेगा। उसके समुद्री बेड़े भी भेजे जाने की बात चली थी। यह अवसर तकरीबन एक वर्ष पहले भी आया था लेकिन अमेरिकी प्रशासन इस निष्कर्ष पर पहुंचा था कि उसे अपने सैनिक उतारने की ज़रूरत नहीं है। वह अब क्या कदम उठाता है, यह देखना होगा। विश्व शांति के लिये इस लड़ाई को टाला जाना चाहिये।

     

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