- डॉ. हनुमन्त यादव
कोरोना कोविड-19 की तीसरी लहर को दूसरी लहर से अधिक खतरनाक और व्यापक होने के बावजूद भारत में तीसरी लहर के अधिक व्यापक होने की संभावना कम है। इसका कारण है कि दूसरी लहर की अवधि में सरकार द्वारा प्रारंभ की गई व्यापक तैयारी का विस्तार होता जा रहा है। चिकित्सालयों में पलंगों की संख्या बढ़ाई जा रही है, आवश्यक दवाइयों और चिकित्सा के साज सामान, व्यक्तिगत सुरक्षा सामग्री और चिकित्सालयों में हर वर्ग के आवश्यक स्टाफ को निरंतर बढ़ाया जा रहा है।
अप्रैल माह से ही कोरोना कोविड-19 महामारी के अनुसंधानकर्ताओं और सिद्धहस्त चिकित्सकों द्वारा यह कहना प्रारंभ कर दिया गया था कि इस महामारी की दूसरी लहर के अधिकतम प्रकरण मई माह में आएंगे तथा जून महीने में उनमें कमी आती जाएगी। इन चिकित्सकों के अनुसार अगस्त 2021 से तीसरी लहर प्रारंभ हो जाएगी जो कम से कम 3 माह तक चलेगी। जून महीने तक कोरोना के तीसरी लहर के अगस्त माह से प्रांरभ होने की संभावनाए व्यक्त की जा रही थी। किंतु जुलाई माह में कोरोना के प्रारंभ होने के लिए सितंबर-अक्टूबर माह का नाम लिया जाने लगा। अक्टूबर महीने में कोरोना की तीसरी लहर कब प्रारंभ होगी इसके बारे में बहुत कम चर्चा हुई। इस महीने चर्चा कोरोना के प्रकरणों एवं टीकाकरण की संख्या पर केन्द्रित हो गई। भारत ने 21 अक्टूबर को 100 करोड़ व्यक्तियों के टीकाकरण की उपलब्धि हासिल की।
भारत सरकार द्वारा कोरोना से संबंधित राज्य और राज्यों के जिले अनुसार सभी दैनिक जानकारी अपनी कोरोना वेबसाइट में दर्शाई जाती है। कोरोना के टीकाकरण संबंधी जानकारी को दिन के समय वेबसाइट में हर क्षण में होने वाले बदलाव को देखा जा सकता है। इस वेबसाइट के अनुसार 25 अक्टूबर पूर्वान्ह कुल 1,02,27,12,895 टीकाकरण हो चुके हैं। भारत में अब तक कोरोना के कुल 3,43,59,562 प्रकरण पाए गए, इनमें से इलाज के बाद 3,35,67,367 ठीक होने के बाद चिकित्सालय से मुक्त कर दिए गए। कोरोना से अब तक 4,54,712 व्यक्तियों की मौत हुई है। वेबसाइट के अनुसार राज्य की प्रति लाख जनसंख्या पर कोरोना प्रकरण और मौतों की संख्या केरल में रही।
भारत में कोरोना कोविड-19 से संबंधित अनेक षोधकर्ताओं के शोधपत्र मेडिकल जर्नलों में समय-समय पर प्रकाशित होते रहे हैं। इन शोधपत्रों मैं डॉ. लिजी थॉमस के शोधपत्र का दायरा अन्य शोधपत्रों से बड़ा है। डॉ. लिजी ने अपने शोधपत्र में भारत सहित विश्व के 15 देशों के कोरोना के प्रथम 2 लहरों की वस्तुस्थिति और तृतीय लहर के पूर्वानुमान प्रस्तुत किए हैं। डॉ, लिजी के अनुसार, कोरोना की प्रथम लहर में भारत में सबसे अधिक प्रकरण सितंबर 2020 में पाए गए जबकि अप्रैल 2021 से प्रारंभ हुए दूसरी लहर में सबसे अधिक प्रकरण मई 2021 माह में रहे खासकर 14 मई को 3,50 हजार रहे। जबकि 1 फरवरी को कुल प्रकरणों की संख्या मात्र 8600 थी। डॉ. लिजी के अनुसार अगस्त माह से प्रारंभ होने वाली तीसरी लहर में सबसे अधिक प्रकरण 5 सितंबर को 622 हजार पाए जाने का अनुमान है। डॉ. लिजी थॉमस सहित सभी कोरोना अनुसंधानकर्ताओं के भारत के संबंध में अनुमान गलत निकले जिन्होंने तीसरी लहर के अगस्त 2021 में प्रारंभ होने की संभावनाएं व्यक्त की थी।
दिसंबर 2019 से प्रारंभ होने वाली कोरोना कोविड-19 से पूरी दुनिया में अब तक 21 करोड़ से अधिक व्यक्ति संक्रमित हो चुके हैं तथा 45 लाख व्यक्तियों की मृत्यु हो चुकी है। लिजी थॉमस के अनुसार, भारत को छोड़़कर उनके द्वारा अध्ययन किए गए अधिकांश देशों में कोरोना की तीसरी लहर आ चुकी है। जापान में तीसरी लहर में पहली लहर की तुलना में 20 गुना प्रकरण बढ़े हैं तथा वहां अब चौथी लहर का आगमन निश्चित माना जा रहा है। जापान के अलावा अध्ययन किए गए अधिकांश देशों में तीसरी लहर प्रारंभ तो हो चुकी है किंतु अगस्त 2021 तक समाप्त नहीं हो पाई थी। इन देशों में प्रथम लहर की तुलना में तीसरी लहर में संक्रमण दर तीन गुना अधिक थी। आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दक्षिणी अमरीकी देशों में कोरोना संक्रमण का प्रबंधन बेहतर रहा है।
कोरोना कोविड-19 की तीसरी लहर के बारे में लगभग सभी शोधकर्ताओं का अनुमान है कि वह हर प्रकार से दूसरी लहर से अधिक व्यापक और खतरनाक होगी। एक शोधकर्ता ने तीसरी लहर से संबंधित तीन परिदृश्य दिए हैं। पहले परिदृश्य के अनुसार अक्टूबर माह में कोरोना के प्रतिदिन 3.2 लाख प्रकरणों साथ चोटी पर होगा। दूसरे परिदृश्य में सितंबर माह में 5.0 लाख प्रकरण प्रतिदिन के साथ कोरोना को चोटी पर दर्शाया गया है। तीसरे परिदृश्य में 2 लाख प्रकरणों के साथ अक्टूबर माह चोटी पर होगा। अधिकांश शोधकर्ताओं का अनुमान है कि तीसरी लहर में भारत के कम से कम 6 करोड़ व्यक्ति कोरोना की चपेट में आ जाएंगे जिसमें सभी उम्र वर्ग के बच्चे शामिल रहेंगे। कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या भी अधिक होगी। यह बीमारी अधिक गंभीर होने के कारण उसके उपचार में अधिक समय लगेगा इसलिए अधिक सावधानी बरतने की जरूरत पड़ेगी। फिलहाल अक्टूबर तक भारत में तीसरी लहर का आगमन नहीं हो पाया है।
भारत के अधिकांश कोरोना चिकित्सकों और शोधकर्ताओं द्वारा तीसरी लहर के अगस्त माह में आने की संभावना व्यक्त की जा रही थी। अगस्त माह प्रारंभ होने के बाद से ही इसके अक्टूबर महीने में आगमन की संभावना व्यक्त की जाने लगी। पश्चिम बंगाल, असम और हिमाचल प्रदेश में ही दुर्गा पूजा और विजयादशमी त्योहारों के कारण अधिक संक्रमण देखे जाने पर कुछ स्थानीय समाचार पत्रों में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका प्रकाशित हुई। दुर्गा पूजा के दौरान पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दिन 867 कोरोना के प्रकरण पाए गए थे। 23 अक्टूबर को 974 कोराना मरीज चिकित्सालयों में भर्ती किए गए, यह पश्चिम बंगाल में एक दिन में कोरोना संक्रमित होने वाले मरीजों में सर्वाधिक थी। फिलहाल भारत सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को निराधार बताया है।
मेरा ऐसा मानना है कि दुनिया में कोरोना कोविड-19 की तीसरी लहर को दूसरी लहर से अधिक खतरनाक और व्यापक होने के बावजूद भारत में तीसरी लहर के अधिक व्यापक होने की संभावना कम है। इसका कारण है कि दूसरी लहर की अवधि में सरकार द्वारा प्रारंभ की गई व्यापक तैयारी का विस्तार होता जा रहा है। चिकित्सालयों में पलंगों की संख्या बढ़ाई जा रही है, आवश्यक दवाइयों और चिकित्सा के साज सामान, व्यक्तिगत सुरक्षा सामग्री और चिकित्सालयों में हर वर्ग के आवश्यक स्टाफ को निरंतर बढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा स्वयंसेवी संगठनों की अधिक संख्या और सुविधाओं के साथ आगे आने के संभावना है। प्रचार तंत्र की व्यापकता के कारण आम जनता से भी अपेक्षा है कि वह तीसरी लहर की अवधि में अधिक सतर्कता से काम करेगी। इन परिस्थितियों में भारत में तीसरी लहर के अधिक व्यापक होने की संभावना कम है, इस कारण संक्रमण पीड़ितों की संख्या और उनके जीवन का खतरा भी दूसरी लहर से कम रहने की संभावना है।