• लोकतंत्र पर बढ़ता तकनीकी साम्राज्यवाद का खतरा

    एक्स' के मालिक एलन मस्क और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा एवं उनकी पत्नी के बीच कटु विवाद छिड़ गया है

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    - जगदीश रत्तनानी

    सामान्य तौर पर, प्रौद्योगिकी कंपनियों की दुनिया में पारदर्शिता को आदर्श स्थान प्राप्त नहीं है। राइड ऐप उबेर के बारे में विचार करें जिसने पहले अपने आकर्षक प्रस्तावों के साथ बाजार पर कब्जा कर लिया और बाद में अपनी शोषणकारी नीतियों के लिए जाना जाने लगा। इस महीने की शुरुआत में हैदराबाद में कैब चालकों ने पारदर्शिता की कमी का हवाला देते हुए उबेर ऐप का बहिष्कार किया था।

    एक्स' के मालिक एलन मस्क और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा एवं उनकी पत्नी के बीच कटु विवाद छिड़ गया है। मस्क ने अदालत के आदेशों का पालन करने से इनकार कर दिया था जिस पर ब्राजीली सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ने 'एक्स' पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद मस्क ने उस न्यायाधीश को 'दुष्ट तानाशाह' कहा। इस विवाद में नवीनतम मोड़ साप्ताहांत में आया जब विश्व भर के नेता जी-20 के 2024 शिखर सम्मेलन के लिए रियो डी जेनेरो में मिलने की तैयारी कर रहे थे।
    पिछले साप्ताहांत जी-20 के एक कार्यक्रम में राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा की पत्नी ने गलत व झूठी सूचना को नियंत्रित करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को विनियमित करने की आवश्यकता बताई थी। बाद में उसने मस्क को चुनौती देते हुए कहा-'एलन मस्क, मैं तुमसे डरती नहीं हूं'। 'एक्स' के मालिक ने राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा और उनकी वर्कर्स पार्टी के स्पष्ट संदर्भ में लिखते हुए तुरंत जवाब दिया: 'वे (डा सिल्वा) अगला चुनाव हारने जा रहे हैं।' इस तरह इस विवाद में मस्क और 'एक्स' ने लोकप्रिय नेता जायर बोल्सोनारो का समर्थन कर दिया जो 2022 का चुनाव हार गए थे। हार के बाद बोल्सोनारो ने चार साल पहले अमेरिकी चुनावों के परिणामों को पलटने के ट्रम्प के प्रयासों की नकल करते हुए 'चुनाव इनकार' का अभियान चलाया।

    विदेशी भूमि में केंद्र की सत्तारुढ़ वामपंथी सरकार के खिलाफ एक धुर दक्षिणपंथी राजनेता के समर्थन में मस्क एक सीधी और खुली लड़ाई लड़ रहे हैं।
    यह एक ऐसा मामला है जिस पर भारत में करीब से ध्यान देना चाहिए जो 'एक्स' के लिए सबसे बड़े बाजारों में से एक है।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं और संभवत: आधुनिक समय के बड़े तकनीकी साम्राज्यवाद के तौर-तरीकों को नजदीक से देख सकेंगे। ईस्ट इंडिया कंपनी को जटिल और कुटिल हथकंडों का इस्तेमाल कर उपमहाद्वीप पर कब्जा करने और उसे लूटने में 100 साल लग गए, तो आज के तकनीकी साम्राज्यवादियों के पास उस कहानी को दोहराने की ताकत है जिसमें लोगों में फूट डालकर विभाजित करने, संस्थानों को तोड़ने और हिंसा भड़काने वाले कोड, क्लिक और क्लिप के अलावा कुछ नहीं है। ब्राजील में की जा रही दखलदांजी इस साम्राज्यवाद का एक क्लासिक उदाहरण है जो तकनीकी ज़ार के रूप में डोनाल्ड ट्रम्प की गोद में बैठे एलन मस्क द्वारा संचालित किया जा रहा है जो हमेशा की तरह लापरवाह तथा अमेरिकी चुनावों में ट्रम्प की जीत से सुर्खियों में है और अब अमेरिका में शक्तिशाली औद्योगिक-सैन्य परिसर का प्रभारी बनाया गया है।

    ब्राजील में इस नाटक का एक बड़ा भाग अमेरिकी चुनावों से पहले भी खेला गया था जिसमें दुष्प्रचार फैलाने के आरोपी खातों को ब्लॉक करने के बारे में ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करने से 'एक्स' और मस्क ने इनकार कर दिया था। ब्राजील सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अलेक्जेंड्रे डी मोरेस ने आदेश दिया था कि अगर प्लेटफॉर्म ब्राजील में कंपनी का कानूनी प्रतिनिधि नियुक्त नहीं करता है तो दुष्प्रचार में शामिल खातों को ब्लॉक कर दिया जाएगा और 24 घंटे के भीतर बकाया दैनिक जुर्माने का निपटान नहीं करता है तो 'एक्स' पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। 'एक्स' और मस्क ने आदेशों पर ध्यान नहीं दिया और न्यायालय के साथ सीधे टकराव का विकल्प चुना जिसके बाद 'एक्स' पर प्रतिबंध लगा दिया गया। बाद में अदालती आदेश के सामने झुकने हुए 50 लाख अमरीकी डालर से अधिक के जुर्माने का भुगतान किया गया।

    इन घटनाओं को देखते हुए भारत को बड़ी तकनीक की शक्ति और पहुंच के प्रति सचेत होना चाहिए जो उन तरीकों को अपना सकते हैं, संप्रभु राष्ट्रों को चुनौती देते हैं और डिजिटल उपनिवेशवाद के उपकरणों के रूप में काम करते हैं। इससे लड़ना मुश्किल होगा। तकनीकी कंपनियों पर कई उदाहरणों के साथ आरोप लगाये गये हैं कि वे उपभोक्ताओं के दिमाग पर कब्जा करने, कपोल कल्पित किस्से फैलाने और असुरक्षा की भावना फैलाने जैसे काम कर रही हैं जो औपनिवेशिक नियंत्रण के किसी भी अन्य साधन की तुलना में एक त्वरित, गुप्त और पूरी तरह से नियंत्रित करने लायक माहौल बनाता है।

    मस्क मुंहजोर है लेकिन उनका यह काम केवल उस मुखौटे को फाड़ने का काम करता है जो सभी तरह के उल्लंघनों के संबंध में उन कंपनियों की बदसूरत वास्तविकता को छुपाता है। प्रौद्योगिकी नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दिलाने के दावे के पीछे की हकीकत यह है कि प्रोद्यौगिकी का उपयोग अल्गोस (ऐल्गरिदम) के माध्यम से लालच, भय और झूठ को बढ़ावा देते हैं, पहुंच बढ़ाने और फर्जी समाचार फैलाने के लिये समूहों द्वारा इस्तेमाल किए जाते हैं। यह निश्चित रूप से उत्तरार्द्ध में ऐसा करता है लेकिन पूर्वार्ध में खींचता भी है और अंत में जितना देता है उससे अधिक ले जाता है।

    सामान्य तौर पर, प्रौद्योगिकी कंपनियों की दुनिया में पारदर्शिता को आदर्श स्थान प्राप्त नहीं है। राइड ऐप उबेर के बारे में विचार करें जिसने पहले अपने आकर्षक प्रस्तावों के साथ बाजार पर कब्जा कर लिया और बाद में अपनी शोषणकारी नीतियों के लिए जाना जाने लगा। इस महीने की शुरुआत में हैदराबाद में कैब चालकों ने पारदर्शिता की कमी का हवाला देते हुए उबेर ऐप का बहिष्कार किया था। उबेर उपभोक्ताओं ने कीमतों में अनुचित 'बढ़ोतरी' की शिकायत की है। भारत के किसी भी शहर में अधिकांश उबेर सवारी नियमित टैक्सी सेवा से अधिक शुल्क लेती हैं।

    'एक्स' ने घोषणा की कि इसके प्लेटफॉर्म पर सभी सामग्री का उपयोग इसके आर्टिफिशियल इंटलिजेंस (एआई) मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए किया जा सकता है। यह घोषणा 15 नवंबर से प्रभावी हो गयी है। पूर्व में 'एक्स' के एआई मॉडल पर फर्जी खबरें फैलाने के आरोप लगते रहे हैं। गूगल और माइक्रोसॉफ्ट सहित अधिकांश अन्य बड़ी टेक कंपनियों को इस बात की बढ़ती जांच का सामना करना पड़ा है कि उनके एआई मॉडल उपयोगकर्ताओं के लिए पहले से न सोचा गया समाधान कैसे प्रस्तुत करते हैं। अमेज़ॅन अपने एकाधिकारवादी व्यवहार के कारण जांच के दायरे में आ गया है। अमेजॅ़न के संस्थापक और वाशिंगटन पोस्ट अखबार के मालिक जेफ़ बेजोस ने अपने अखबार से इस बार अमेरिकी चुनावों में किसी भी उम्मीदवार का समर्थन नहीं करने को कहा जिसके बाद विरोध प्रदर्शन हुए और 250,000 से अधिक पाठकों ने सब्सक्रिप्शन रद्द कर दिए। अमेज़ॅन, वेब सर्विसेज़ (एडब्लूएस) न केवल ई-स्टार्ट में अग्रणी है, बल्कि एक ताकत है, लेकिन एडब्लूएस पर भारत और अन्य जगहों पर स्थानीय प्रतिस्पर्धा को खत्म करने और श्रमिकों का शोषण करने का आरोप लगाया गया है। एडब्लूएस क्लाउड कंप्यूटिंग सेवाएं प्रदान करता है। ये सेवाएं, संगठनों को तेज़ी से आगे बढ़ने, लागत कम करने और विस्तार करने में मदद करती हैं।

    भारत सरकार ने पूर्व में तकनीक के प्रभाव पर चर्चा की है। सरकार के राजनीतिक पक्ष ने भी तकनीक का उपयोग उन तरीकों से किया है जो स्वच्छ या पारदर्शी नहीं हैं। यह इस मुद्दे को और अधिक जटिल बनाता है। उदाहरणार्थ, सरकार पर चुनिंदा भारतीय राजनेताओं और पत्रकारों को निशाना बनाने के लिए पेगासस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने के आरोप लगे जिसके जरिए आज की तकनीक-सक्षम प्रणालियों में निगरानी संभव है। लेकिन इसका पहलू यह है कि जो लोग निगरानी कर रहे हैं और शायद इन प्रणालियों के लिए भुगतान कर रहे हैं उन्हें खुद को उन्हीं प्रणालियों द्वारा देखा और सुना जा रहा है जिसका उन्होंने साथी नागरिकों के खिलाफ उपयोग किया होगा।

    भारतीय नीति की बिग तकनीक का क्या मतलब है? जब एक ट्वीट कर दंगा करना उतना ही आसान है या किसी एकाउंट को ब्लॉक कर एक आवाज को चुप कराना आसान है तो ऐसी परिस्थियों में लोकतंत्र को कैसे संरक्षित और मजबूत किया जा सकता है? यदि हमारी सिस्टम के बाहर के लोगों से अधिक की अपेक्षा है तो हमें देश के भीतर ज्यादा पारदर्शिता की आवश्यकता होगी ।
    (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। सिंडिकेट: द बिलियन प्रेस)

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