- डॉ. हनुमन्त यादव
कोरोना की तीसरी लहर अक्टूबर में 2 माह के लिए पूरे भारत में अपेक्षित है, इसलिए उन्होंने सभी को सावधानी बरतने की सलाह दी है। इसका उद्योग व्यवसाय पर भी प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। ऐसी स्थिति में दशहरा, दिवाली त्योहार के दिनों में शेयरों की चाल नियंत्रित रहने की संभावना है। छोटे निवेशकों को सावधानी बरतने के दिन आ गए हैं। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में ब्याज दरों में कमी की संभावना बहुत ही कम है।
अगस्त माह की शेयर बाजार की समीक्षा के अंत में यह कहा गया था कि सितंबर माह के दूसरे पखवाड़े तक कोरोना काल के बावजूद सेंसेक्स के 60 हजारी बन जाने की पूरी संभावना है। 24 सितंबर को सेंसेक्स ने 60 हजार का बिंदु पार कर के साठ हजारी बनने का कीर्तिमान बनाया। सितंबर महीने में सेंसेक्स ने 3 कीर्तिमान बनाए। पहला कीर्तिमान 3 सितंबर को 58,000, दूसरा कीर्तिमान 16 सितंबर को 59,000 एवं तीसरा, 60 हजारी बनने का कीर्तिमान 24 सितंबर को बनाया। 31 अगस्त को सेंसेक्स 57,552.39 बिंदु पर बंद हुआ था। 30 अगस्त से 3 सितंबर के कारोबारी सप्ताह में सेंसेक्स ने उछाल के दो कीर्तिमान बनाए थे। पहला 31 अगस्त को 57,000 बिंदु को पहली बार पार करने का तथा दूसरा 3 सितंबर को 58,000 बिंदु को पार करने का कीर्तिमान। सेंसेक्स ने ऐसा कीर्तिमान अपने इतिहास में पहली बार बनाया।
6 सितंबर से 15 सितंबर तक बाजार में लिवाली और बिकवाली के सौदे सामान्य गति से चलते रहे। 16 सितंबर गुरूवार को बड़ी मात्रा में सौदे होने के कारण सेंसेक्स पहली बार 59,000 का बिंदु पार करने का कीर्तिमान बनाते हुए 59,141.16 बिंदु स्तर पर बंद हुआ। 18 सितंबर को पूरी दुनिया भर के बाजारों में चीन की अग्रणी रीयल इस्टेट कंपनी एवरग्रेनेड के भारी कर्जदार हो जाने का समाचार तेजी से फैला। इस समाचार के शेयर बाजारों में पहुंचते ही सोमवार 20 सितंबर को निवेशकों द्वारा बड़ी मात्रा में शेयरों की बिक्री करने से भारतीय बाजार में भारी गिरावट आने के कारण सेंसेक्स 59,000 अंक से नीचे गिरकर 58,490.93 पर बंद हुआ। बीएसई का बाजार पूंजीकरण घटकर 255.18 लाख करोड़ रुपये रह गया। इस कारण शेयर निवेशकों को 3.78 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
किंतु भारतीय शेयर बाजार में चीनी कंपनी के गिरावट का प्रभाव अल्पकालिक रहा। 21 सितंबर को शेयरों की भारी लिवाली के कारण बाजार में पुन: रौनक आई और सेंसेक्स पुन: 59,000 बिंदु पार करते हुए 59,005.25 बिंदु पर बंद हुआ। देशी विदेशी निवेशकों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अमेरिका दौरे से बहुत उत्साह था। 23 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमेरिका के पांच अग्रणी कारपोरेट मुखिया लोगों की भेंट से उत्साहित होकर निवेशकों द्वारा भारी लिवाली की गई फलस्वरूप सेंसेक्स छलांग लगाते हुए 59,885.36 बिंदु तक जा पहुंचा। 24 सितंबर को सेंसेक्स 60,000 बिंदु के पार 60,211 पर खोला गया जो 60,333 बिंदु के उच्चतम स्तर पर जाकर बंद के समय 60,048.47 पर आ गया था। इस सप्ताह में आए उछाल का श्रेय बड़े निवेशकों के वर्ग ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दिया।
सितंबर माह के अंतिम सप्ताह में 27 सितंबर से 30 सितंबर तक निवेशकों द्वारा मुनाफा कमाने हेतु की गई भारी बिकवाली के कारण सेंसेक्स और निफ्टी उतार-चढ़ाव के साथ हर दिन गिरावट के साथ बंद हुए। 29 सितंबर को बाजार लाल निशान पर बंद होने के फलस्वरूप सेंसेक्स गिरावट के साथ 59,413 बिंदु पर बंद हुआ था। सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार 30 सितंबर को भी शेयर बाजार लाल निशान पर बंद हुआ। सेंसेक्स 286 अंक गिरावट के साथ 59,126.36 बिंदु बंद हुआ। 30 सितंबर को अमेरिका के शेयर बाजारों में मिलाजुला कारोबार देखने को मिला। डाउ जोस 0.26 फ ीसदी चढ़कर 34,390 पर बंद हुआ जबकि नैस्डैक 0.24 फ ीसदी कमजोरी के साथ 14,512 पर बंद हुआ। एस एंड पी 500 0.16 फीसदी चढ़ावट के साथ 4359.00 पर बंद हुआ।
30 सितंबर को समाप्त हुए कारोबारी सप्ताह में मिड और स्माल कैप शेयरों में बढ़त देखने को मिली। बीएसई मिड कैप सूचकांक 0.33 प्रतिशत तथा स्माल कैप सूचकांक 0.56 प्रतिशत बढ़त के साथ बंद हुआ। कारपोरेट के सभी सेक्टरों में तेजी रहने के कारण बाजार हरे निशान पर बंद हुए। इनमें एफएमसीजी, फायनेंस सर्विस बैंक, रियल्टी, प्राइवेट बैंक, मेंटल, आईटी, पीएसयू बैंक, फार्मा और आटो सभी शामिल थे। बीएसई में 5,218 कंपनियोंं के शेयर सूचीकृत हैं, उनमें से 3,424 शेयरों में ही कारोबार हुआ। इनमें से 1427 शेयरों में गिरावट आई और 1847 शेयरों में बढ़त रही। बाजार में सूचीकृत इन कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 259.87 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। सेंसेक्स के 21 शेयर्स कमजोरी के साथ और 9 शेयर्स बढ़त के साथ बंद हुए। बीएसई पर कारोबार के दौरान 220 शेयर 52 हफ्ते के उच्च स्तर पर तथा 24 शेयर निचले स्तर पर कारोबार करते दिखे।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ्टी 31 अगस्त के बंद के समय 17,132.39 बिंदु पर था। सितंबर के दूसरे सप्ताह में निफ्टी ने 17,500 बिंदु पार कियाा। निफ्टी 16 सितंबर को बाजार बंद के समय 17,629.50 बिंदु पर था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमेरिका यात्रा के समय निफ्टी में उछाल आया। 23 सितंबर को निफ्टी 17,700 बिंदु पार करके 17,711 पर बंद हुआ तथा 24 सितंबर को तेजी के साथ 17,800 पार करते हुए बाजार बंद के समय अब तक के उच्चतम स्तर 17,820.53 पर पहुंच गया था। 27 सितंबर के बाद कारोबार के दौरान मुनाफा बिकवाली किए जाने के कारण निफ्टी 17,700 बिंदु से नीचे जाकर 30 सितंबर को बाजार बंद के समय 16 सितंबर की स्थिति पर 17,618.15 बिंदु तक उतर आया था। निफ्टी 1 अक्टूबर को 17,600 से नीचे उतरते हुए बाजार बंद के समय 17,532 अंक पर था।
बाजार में सूचीकृत 5218 कंपनियों का 30 सितंबर को बाजार पूंजीकरण 259.87 लाख करोड़ रुपये था। उनमें से सेंसेक्स की चोटी की 10 कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 74.20 लाख करोड़ रुपये था। इस प्रकार चोटी की 10 कंपनियों के पास बाजार पूंजीकरण की 28 प्रतिशत पूंजी है। चोटी की 10 कंपनियां ये हैं- रिलायंस इंडस्ट्रीज, टीसीएस, एचएडएफ सी बैंक, इंफ ोसिस, हिन्दुस्तान यूनीलीवर, एचएडएफ सी हाउसिंग फायनेंस, आईसीआईसीआई बैंक, विप्रो, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया।
एम्स दिल्ली के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया के ताजा वक्तव्य के अनुसार कोरोना की तीसरी लहर अक्टूबर में 2 माह के लिए पूरे भारत में अपेक्षित है, इसलिए उन्होंने सभी को सावधानी बरतने की सलाह दी है। इसका उद्योग व्यवसाय पर भी प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। ऐसी स्थिति में दशहरा, दिवाली त्योहार के दिनों में शेयरों की चाल नियंत्रित रहने की संभावना है। छोटे निवेशकों को सावधानी बरतने के दिन आ गए हैं। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में ब्याज दरों में कमी की संभावना बहुत ही कम है। फिर भी सेंसेक्स दशहरा त्योहार पर पुन: 60,000 बिंदु पार करने का प्रयास कर सकता है। सेंसेक्स और निफ्टी ने जो चढ़ाई 24 सितंबर को की थी वैसी चढ़ाई दिवाली के अवसर पर करके सेंसेक्स 62,000 बिंदु और निफटी 18,000 बिंदु पार कर सकते हैं।