- डॉ. हनुमन्त यादव
कोरोना की दूसरी लहर के चालू रहते व तीसरी लहर के आगमन की संभावना बनी रहने के कारण वित्तीय स्थिति कमजोर बनी रहने के बावजूद सरकार ने सांसद एमपीलैड को नवंबर से चालू करने की उदारता का दयालुपन क्योंकर दिखाया। इसका एक ही उत्तर है कि फरवरी-मार्च 2022 में जिन 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं इनमें उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर कुल 4 राज्य भाजपा शासित हैं।
भारत सरकार की केबीनेट द्वारा 10 नवंबर को कोरोना महामारी के कारण रोकी गई सांसद क्षेत्रीय विकास निधि एमपीलैड को पुन: बहाल करने के निर्णय का सार्वजनिक ऐलान कर दिया गया है। लोकसभा सदस्यों को सांसद क्षेत्रीय विकास निधि के तहत अपने क्षेत्र में विकास कार्यों हेतु हर साल 5 करोड़ रुपये तक का कार्य करवाने का अधिकार मिला हुआ है। राज्यसभा सदस्य अपने राज्य के किसी भी क्षेत्र के विकास कार्य हेतु 5 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग कर सकते हैं। जून 2020 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देशवासियों के नाम संबंोधन में भयंकर कोरोना संकट से निपटने के लिए सांसद क्षेत्रीय विकास निधि एमपीलैड की राशि के उपयोग का ऐलान किया गया था।
संसदों द्वारा उनके संसदीय क्षेत्र में विकास कार्यों हेतु 5 करोड़ रुपये की क्षेत्रीय विकास निधि की राशि को उनको आबंटन व्यय किए जाने की मांग की जाती रही थी। 11 फरवरी को संसद में सांसदों की मांग का उत्तर देते हुए संाख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन राज्यमंत्री राव इन्द्रजीत सिंह ने कहा था कि सरकार ने 2020-21 और 2021-22 के दो सालों के लिए संासद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना एमपीलैडस को संचालन नहीं करने का निर्णय लिया है। सरकार इस राशि का उपयोग जनता को स्वास्थ्य सुविधाएं एवं जरूरतमंद गरीब लोगों को मुफ्त भोजन सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए करेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 21 जून को देश के नाम अपने संदेश में कहा था कि इस धनराशि का उपयोग देश को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही नवंबर 2021 तक 80 करोड़ गरीब और जरूरतमंद लोगों को नवंबर 2021 तक मुफ्त अनाज सुविधा उपलब्ध करवाएगी। प्रधानमंत्री के संदेशानुसार सरकार द्वारा नवंबर तक जरूरतमंद लोगों को मुफ्त अनाज एवं दवाई सुविधाओं की पूर्ति होती रहेगी।
सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि एमपीलैड योजना 1993 में प्रधानमंत्री नरसिम्हाराव के प्रधानमंत्रीकाल में प्रारंभ की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय सांसदों द्वारा सिफारिश की गई विकासात्मक कार्यों के लिए धन उपलब्ध कराना था। प्रारंभ में फंड की राशि सालाना 1 करोड़ रुपये थी जिसे बाद में बढ़ाकर सालाना 2 करोड़ रुपये कर दिया गया था। 2011-12 में इस फंड राशि को बढ़ाकर सालाना 5 करोड़ रुपये कर दिया गया था। योजना का मुख्य उद्देश्य सांसदों द्वारा विकासात्मक कार्यो से संबंधित सुझावों पर राशि उपलब्ध करवाना है। इन विकासात्मक कार्यों में पीने का पानी, सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता के साथ-साथ बेहतर सड़कों के निर्माण और अन्य मूलभूत सुविधाएं शामिल है।
1999-2000 में सांसद क्षेत्रीय विकास निधि एमपीलैड की तर्ज पर 'विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि एमएलए-लैड' स्कीम प्रारम्भ की गई थी। योजना के प्रारम्भिक वर्ष 1999-2000 में प्रत्येक विधायक उसके क्षेत्र के विकास कार्यों के संचालन हेतु 25.00 लाख रुपये की सिफारिश अभिसंशित करने के लिये अधिकृत थे। यह योजना शत प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित है। इस योजना के अंतर्गत पंचायती राज, स्वायतशासी निकाय, राज्य सरकार से संबंधित विभागों द्वारा गठित निगम, बोर्ड एवं अभिकरणों द्वारा चलाए जा रहे निर्माण कार्य का पंजीयन कराया जा सकता है। जिला स्तर पर उक्त कार्यक्रम के संचालन हेतु जिला परिषद (ग्रामीण विकास प्रकोष्ठ) नोडल संस्था हैं। इस कार्यक्रम के तहत विधायकों की सिफारिश पर पंजीकृत संस्था 10 लाख रुपये तक की लागत की परिसम्पत्ति का निर्माण करवा सकती हैं।
कोरोना के प्रकोप का मुकाबला करने के लिए 2020-21 एवं 2021-22 इन दो सालों के लिए स्थानीय क्षेत्र विकास निधि एमपीलैड योजना का क्रियान्वयन स्थगित किया गया था किंतु केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 11 नवंबर को लिए गए निर्णय अनुसार दिसंबर से मार्च 2022 तक सांसदों की सिफारिश पर करवाए जाने वाले निर्माण कार्य हेतु 2 करोड़ रुपयों की स्वीकृति दे दी है। अगले साल 2022-23 से पुन: 5 करोड़ रुपये तक के विकास निर्माण कार्य हेतु सांसदों को सालाना सिफारिश का अधिकार प्राप्त हो जाएगा।
सवाल उठता है कि कोरोना की दूसरी लहर के चालू रहते व तीसरी लहर के आगमन की संभावना बनी रहने के कारण वित्तीय स्थिति कमजोर बनी रहने के बावजूद सरकार ने सांसद एमपीलैड को नवंबर से चालू करने की उदारता का दयालुपन क्योंकर दिखाया। इसका एक ही उत्तर है कि फरवरी-मार्च 2022 में जिन 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं इनमें उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर कुल 4 राज्य भाजपा शासित हैं। वर्तमान में भाजपा के पास उत्तरप्रदेश विधानसभा की 404 सीटों में से 312 सीटों पर, और उत्तराखंड में 70 सीटों में से 57 सीटों पर जीत के कारण दो तिहाई से अधिक सीटों पर कब्जा है। इन राज्यों में भाजपा के पास दो तिहाई से अधिक बहुमत है इसलिए इन राज्यों में भाजपा दो तिहाई बहुमत प्राप्त करना चाहती है। किसान आन्दोलन के कारण उत्तराखंड, पश्चिम उत्तरप्रदेश के जिलों और पंजाब में भाजपा से दूरी बनाए किसानों को मनाने के लिए एमपीलैड स्कीम में सांसदों को दी जाने वाली धनराशि से उन किसानों की पसंद की योजनाओं में व्यय किए जाने से उनको मनाने में मदद मिल सकेगी।
गोवा में 40 सीटों में से 27 सीटों तथा मणिपुर की 60 सीटों में से भाजपा 21 सहयोगी दलों 10 कुल 31 सीटों पर कब्जा होने से वहां भी भाजपा का शासन है। इसलिए गोवा और मणिपुर में भाजपा के लिए अपने बलबूते बहुमत प्राप्त करना जरूरी है। इस प्रकार भाजपा के लिए इन राज्यों के विधानसभा चुनाव बहुत महत्वपूर्ण हैं। भाजपा का आकलन है कि इन राज्यों में पुन: भाजपा के इन सीटों पर जीत के लिए सांसद एमपीलैड स्कीम के अंतर्गत सहायता हितकारी सिद्ध हो सकेगी।
उत्तरप्रदेश से वर्तमान लोकसभा में भाजपा के 67 तथा राज्यसभा के 15 कुल 82 सांसद हैं। इनको प्रति सांसद 2 करोड़ रुपये राशि की दर से विकास कार्यों के माध्यम से कुल 164 करोड़ रुपये जारी स्वीकृत किए जा रहे हैं। इसी प्रकार उत्तराखंड में लोकसभा के 5 और राज्यसभा के 2 सांसदों को कुल 14 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। गोवा, पंजाब और मणिपुर के सांसदों को भी एमपीलैड स्कीम के तहत राशि जारी की जाएगी। इस धनराशि का पार्टी कार्यकर्ताओं के माध्यम से जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाकर वोट बैंक बनाना भाजपा के लिए चुनाव में अवश्य ही फायदेमंद साबित होगा। इसी बात को सोच-समझकर भाजपा के रणनीतिकारों ने सांसद एमपीलैड योजना को अप्रैल 2022 की बजाय दिसंबर 2021 से प्रारंभ करवा कर प्रति सांसद 2 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ करवा दी है।