- डॉ. हनुमन्त यादव
पहले भारत, विदेशी एफडीआई निवेशकों के पसंद के अधिमान देशों में नौवें स्थान पर था। अब भारत में बढ़ते हुए निवेश को देखते हुए कहा जा सकता है कि भारत पांचवें स्थान पर आ गया है। वर्तमान में निवेश के अनुकूल हेतु परिस्थितियां बनी हुई हैं किंतु कोरोना की तीसरी लहर अभी तक नहीं आई है। उससे मुकाबला करने के लिए सरकार एवं उद्योग व्यवसाय द्वारा पूरी सावधानी बरतने के बावजूद एफडीआई पूंजी निवेश को कितनी क्षति पहुंचेगी उसके बारे में कहना कठिन है।
2021-22 में जून माह के बाद कोरोना की लहर धीमी होने, भारत सरकार द्वारा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हेतु स्वागत से नियमों को लागू करने एवं निवेश हेतु औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ाने के कारण प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में वृद्धि हुई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा 23 सितंबर को जारी अधिसूचना के अनुसार अप्रेल से जुलाई 2021 के चार महीनों में 27.37 बिलियन अमरीकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रवाह भारत में हुआ जो 2020 के इन्हीं चार महीनों के 16.92 बिलियन अमरीकी डॉलर के निवेश प्रवाह से 62 प्रतिशत अधिक रहा। यह अनुमान लगाया जा रहा है कि अगस्त-सितंबर के दो महीनों में 15.0 बिलियन डॉलर का निवेश हुआ है। इसको देखते हुए सितंबर में समाप्त छमाही में पिछले साल की छमाही की तुलना में निवेश दुगुना से अधिक हो जाने की संभावना है।
भारत में निवेशकर्ता देशों, निवेश प्रवाह प्राप्त राज्यों और उद्योगों से पहले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का आशय, उसके घटकों एवं मार्गों को समझ लेना जरूरी है। भारत के आर्थिक विकास में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश एफडीआई की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यह बिना कर्ज लिए पूंजी जुटाने का महत्वपूर्ण स्रोत है। इसलिए सरकार का प्रयास रहा है कि वह एक सक्षम और निवेशक अनुकूल नीति लागू करे। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के इक्विटी केपिटल घटक, स्वचालित घटक एवं सरकारी घटक तीनों ही घटकों तथा इनके साथ ही स्वचालित और सरकारी, दोनों ही मार्गों से भी निवेश में वृद्धि दर्ज की गई है। इस प्रकार भारत में सभी मार्गों एवं सभी घटकों के माध्यम से निवेश में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, इसके साथ ही सभी औद्योगिक सेक्टरों में निवेश बढ़ा है।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के इक्विटी केपिटल, पुनर्निवेशित आय एवं इंट्रा कंपनी मार्ग इन तीन मार्गों में से सबसे अधिक निवेश इक्विटी केपिटल मार्ग के माध्यम से तथा स्वचालित और सरकारी मार्ग इन दो मार्गों में से स्वचालित मार्ग माध्यम से अधिक पूंजी निवेश होता है। भारतीय कानून में किए गए संशोधन के अनुसार चीन और पाकिस्तान के अलावा दुनिया के सभी देशों को भारत की कंपनियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की स्वतंत्रता है। उपरोक्त के अलावा विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के माध्यम से भी विदेशी पूंजी का देश में प्रवाह होता है। इस माध्यम के अंतर्गत विदेशी कंपनी देश की किसी एक कंपनी के शेयर और बॉण्ड खरीदती है। भारतीय कानून के अनुसार निवेशकर्ता को भारतीय कंपनी की प्रदत्त पूंजी में उसका 24 प्रतिशत तक बिना पूर्व सरकारी अनुमति के निवेश करने की स्वतंत्रता है।
2021-22 साल के पहले चार महीनों में कुल 27.37 बिलियन अमरीकी डॉलर में से 20.42 बिलियन अमरीकी डॉलर का इक्विटी केपिटल के रूप में प्रवाह हुआ था जो 2019-2020 के 9.61 बिलियन अमरीकी डॉलर की तुलना में 112 प्रतिशत है। 2020-21 की 30 सितंबर को समाप्त पहली छ:माही में सबसे अधिक विदेशी निवेश का प्रवाह ऑटोमोबाइल उद्योग में हुआ है इसमें कुल एफडीआई प्रवाह का 23 प्रतिशत योगदान रहा है। 18 प्रतिशत प्रवाह के साथ कंप्यूटर सॉफ्टवेयर दूसरे स्थान पर तथा 10 प्रतिशत प्रवाह के साथ सेवा क्षेत्र का तीसरा स्थान रहा। पिछले साल इन्हीं चार महीनों में सबसे अधिक 44 प्रतिशत एफडीआई प्रवाह कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर तथा हार्डवेयर सेक्टर में हुआ था। दूसरे नम्बर पर 13 प्रतिशत प्रवाह अधोसंचना विनिर्माण गतिविधियों तथा तीसरे नम्बर पर 13 प्रतिशत प्रवाह सेवा क्षेत्र में हुआ था।
30 सितंबर को समाप्त तिमाही में कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह का सबसे अधिक 45 प्रतिशत हिस्सा कर्नाटक राज्य का रहा। 23 प्रतिशत प्रवाह हिस्से के साथ महाराष्ट्र दूसरे तथा 12 प्रतिशत हिस्से के साथ दिल्ली राज्य तीसरे स्थान पर रहे। 2019-20 में कुल एफडीए का सबसे अधिक 37 प्रतिशत इक्विटी प्रवाह गुजरात राज्य में हुआ था जबकि 27 प्रतिशत प्रवाह के साथ महाराष्ट्र दूसरे तथा 13 प्रतिशत इक्विटी प्रवाह के साथ कर्नाटक तीसरे स्थान पर थे।
पिछले एक दशक से भारत सरकार द्वारा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रवाह और आर्थिक विकास को लेकर बहुआयामी प्रयास किए जा रहे हैं। निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए राप्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना, प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना और आत्मनिर्भर भारत अभियान प्रारंभ किए गए हैं। घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए मेक इन इंडिया पहल के एक हिस्से के रूप में पिछले कुछ सालों से सरकार ने कई क्षेत्रों में एफडीआई के नियमों में ढील दी है। अनुकूल जनसांख्यिकी, प्रभावशाली मोबाइल और इंटरनेट की पहुंच, बड़े पैमाने पर खपत और प्रौद्योगिकी के उपयोग जैसे कारकों ने एफडीआई प्रवाह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
डीपीआईटी रिपोर्ट के अनुसार, 2021-22 के अप्रेल से सितंबर के छ: महीनों में पिछले दो सालों की भांति कुल 17.41 अरब डॉलर निवेश प्रवाह के साथ सिंगापुर सबसे अधिक एफडीआई प्रवाह के साथ पहले स्थान पर कायम है। भारत में एफडीआई प्रवाह के आधार पर अमेरिका 13.82 अरब डॉलर दूसरे, मॉरिशस 5.64 अरब डॉलर तीसरे, केयमन आइसलैंड 2.79 अरब डॉलर, चौथे, नीदरलैंड 2.78 अरब डॉलर पांचवे, ग्रेट ब्रिटेन 2.04 अरब डॉलर छठवे, जापान 1.95 अरब डॉलर सातवें तथा जर्मनी 66.7 करोड़ डॉलर आठवे स्थान पर रहे। 2020-21 की पहली छ:माही में भारत में निवेशित 40.12 बिलियन अमरीकी डॉलर में से 35.63 बिलियन अमरीकी डॉलर भारत की कंपनियों की शेयर पूंजी के रूप में निवेश किए गए थे। भारत में 2019-20 की पहली छ:माही में एफडीआई प्रवाह के आधार पर सिंगापुर पहले स्थान पर कायम है। दूसरे स्थान पर अमेरिका, तीसरे स्थान पर मॉरिशस, चौथे स्थान सउदी अरब, और पांचवे स्थान ब्रिटेन थे।
पहले भारत, विदेशी एफडीआई निवेशकों के पसंद के अधिमान देशों में नौवें स्थान पर था। अब भारत में बढ़ते हुए निवेश को देखते हुए कहा जा सकता है कि भारत पांचवें स्थान पर आ गया है। वर्तमान में निवेश के अनुकूल हेतु परिस्थितियां बनी हुई हैं किंतु कोरोना की तीसरी लहर अभी तक नहीं आई है। उससे मुकाबला करने के लिए सरकार एवं उद्योग व्यवसाय द्वारा पूरी सावधानी बरतने के बावजूद एफडीआई पूंजी निवेश को कितनी क्षति पहुंचेगी उसके बारे में कहना कठिन है। फिर भी यदि सब कुछ ठीक ठाक रहता है तो अक्टूबर-मार्च छमाही में हर माह भारत में एफडीआई निवेश तेजी से बढ़ने की संभावना है जिससे कोरोनाकाल जारी रहते हुए भी एफडीआई निवेश पिछले साल की तुलना में दुगुना होने की पूरी संभावना है।