- डॉ. हनुमन्त यादव
एवरग्रेनेड दुनिया की फॉरचून 500 में शामिल है किंतु कंपनी की वित्तीय स्थिति बहुत खराब है। चीन की इस कंपनी पर जो कर्ज है वह पिछले एक दशक में 56 गुना बढ़ गया है। लेकिन चीन की सरकार फिलहाल एवरग्रेनेड कंपनी के दिवालियापन की आशंका से इंकार कर रही है। समस्या यह है कि अनेक ऐसी परियोजनाएं हैं जिसमें एवरग्रेनेड ने निवेश तो भारी भरकम किया है।
18 सितंबर को पूरी दुनिया भर के बाजारों में चीन की अग्रणी रियल इस्टेट कंपनी एवरग्रेनेड के भारी कर्जदार हो जाने के कारण उसके दिवालियापन के कगार पर पहुंचने का समाचार तेजी से फैला। इस समाचार के शेयर बाजारों में पहुंचते ही सोमवार 20 सितंबर को दुनिया भर के निवेशकों द्वारा बड़ी मात्रा में शेयरों की बिक्री करके बाजार से पैसा निकालने के कारण बाजारों में भारी गिरावट आई। पूरी दुनिया भर के शेयर बाजारों से निवेशकों द्वारा 165 लाख करोड़ रुपये निकालने का समाचार है। एक ही दिन में दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपतियों की संपत्ति को 2 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। एवरग्रेनेड कंपनी पर 300 बिलियन डॉलर यानी 22 लाख 50 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है।
सोमवार 20 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार लाल निशान पर बंद हुए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 525 अंकों की गिरावट के साथ 58,490.93 पर बंद हुआ, वही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 188 अंकों की गिरावट के साथ 17,396.90 पर बंद हुआ। इस कारण शेयर निवेशकों को 3.78 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। बीएसई का बाजार पूंजीकरण घटकर 255.18 लाख करोड़ रुपये रह गया। इस प्रकार 20 सितंबर को निवेशकों को प्रति मिनट 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। टाटा स्टील, जिंदल स्टील, हिंडाल्कों, अीपीसीएस, और यूपीएल कि शेयर लाल निशान पर बंद हुए। सेक्टोरियल इंडेक्स में फाइनेंस, सर्विस बैंक, प्राइवेट बैंक, आई टी, मेटल, रियल्टी और फार्मा सभी लाल निशान पर बंद हुए।
एवरग्रेनेड कंपनी ने चीन में 280 से अधिक नगरों में लाखों घरों का निर्माण किया है। पिछले एक दशक में चीन में जो संपत्ति में उछाल आया है, उसमें एवरग्रेनेड का बहुत बड़ा रोल रहा है। लेकिन अब स्थिति में इतना बदलाव हुआ है कि चीन की कई हाउसिंग प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पाने के कारण इस कंपनी के 75 लाख करोड़ रुपये फंस गए हैं। एवरग्रेनेड के ये हाउसिंग प्रोजेक्ट अधूरे पड़े हुए हैं। लाखों लोग बेरोजगार हो गए हैं। चीन के नगरों में इस कंपनी के विरूद्ध लोगों के विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। एवरग्रेनेड को गुरुवार तक कुल कर्ज में से 5 हजार करोड़ रुपये की किश्त का भुगतान करना था किंतु भुगतान में असफल रहने के कारण बड़ी-बड़ी रेटिंग एजेंसियों ने इसकी रेटिंग को घटा दिया है।
एवरग्रेनेड द्वारा भुगतान करने में असफलता को देखते हुए शेयर बाजारों और बड़े वित्तीय संस्थानों में वर्ष 2008 में अमेरिका के बहुत बड़े वित्तीय संस्थान और बैंक लेहमैन ब्रदर्स के डूब जाने के बारे में सितंबर के तीसरे सप्ताह तक ही चर्चा होती रही। 5 सितंबर, 2008 को लेहमैन ब्रदर्स के आधिकारिक रूप से दिवालिया हो जाने के फलस्वरूप भारत समेत दुनिया के सभी शेयर बाजार धाराशायी हो गए थे। जब अमेरिका का यह वित्तीय संस्थान डूबा था तो विश्व की अर्थव्यवस्था 6 प्रतिशत तक सिकुड़ गई थी। इस प्रकार वैश्विक अर्थव्यवस्था ने मंदी की राह पकड़ ली थी। पूरी दुनिया में साढ़े 6 करोड़ लोगों की नौकरियां चली गई थी। भारत में भी 5 लाख लोग बेरोजगार हो गए थे। अब ठीक 13 साल बाद फिर वैसे ही हालात बनते दिख रहे हैं, इस बार अमेरिका से नहीं बल्कि चीन से मंदी की आहट सुनाई दे रही है।
यदि चीन की वामपंथी सरकार एवरग्रेनेड को दिवालियापन से नहीं बचा पाती है तो भारतीय उद्योग और व्यापार जगत भी प्रभावित होगा। भारत में इस्पात बनाने वाली कंपनियां वर्तमान में 90 प्रतिशत माल चीन को ही बेचती है। मेटल और आयरन-और निर्माता कंपनियां भी 90 प्रतिशत माल चीन को ही बेच रही हैं। इन भारतीय उत्पादों के बड़े खरीदारों में चीन की एवरग्रेनेड भी एक है जो घरों के निर्माण में इन भारतीय उत्पादों का उपयोग करती है। अब यदि एवरग्रेनेड सचमुच ही डूबती है तो भारत का निर्यात भी प्रभावित होगा। भारत के 25 लाख लोग लौह व इस्पात उद्योग में रोजगार प्राप्त हैं, चीन की इस एक कंपनी के इूब जाने से वे प्रभावित होंगे। इसके अलावा चीन की जिन कंपनियों ने भारत में निवेश किया है वे भी एवरग्रेनेड के डूबने से प्रभावित होंगी।
चीन की कंपनियों ने भारत में 60 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया हुआ है। भारत में इस समय जितने बड़े स्टार्ट-अप्स हैं उनमें भी चीन की कंपनियों के 42 हजार करोड़ रुपये लगे हुए हैं। ये भी इससे प्रभावित होंगी और इनमें काम करने वाले लाखों लोगों के जीवन पर भी इसका असर पड़ना स्वाभाविक है।
एवरग्रेनेड दुनिया की फॉरचून 500 में शामिल है किंतु कंपनी की वित्तीय स्थिति बहुत खराब है। चीन की इस कंपनी पर जो कर्ज है वह पिछले एक दशक में 56 गुना बढ़ गया है। लेकिन चीन की सरकार फिलहाल एवरग्रेनेड कंपनी के दिवालियापन की आशंका से इंकार कर रही है। समस्या यह है कि अनेक ऐसी परियोजनाएं हैं जिसमें एवरग्रेनेड ने निवेश तो भारी भरकम किया है किंतु उसको एक चौथाई आमदनी भी नहीं हो पाई है। कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं: एवरग्रेनेड ने इसी साल साढ़े 6 लाख रुपये पूंजी लगाकर इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण का कारोबार प्रारंभ किया किंतु कंपनी अभी तक एक वाहन की बिक्री भी नहीं कर पाई है। कंपनी का मिनरल वाटर परियोजना भी भारी घाटे में चल रही है। खस्ता वित्तीय हाल के होते हुए भी एवरग्रेनेड ने एक फुटबॉल एकेडमी बनाई और चीन में ही दुनिया का सबसे बड़ा फुटबॉल स्टेडियम का निर्माण किया जिसमें 1 लाख दर्शक बैठ सकते हैं। इससे एवरग्रेनेड को पब्लिसिटी तो मिली किंतु यह भी वित्तीय घाटे की प्रोजेक्ट साबित हुई।
भारतीय निवेशकों के बीच निराशा का माहौल केवल 20 सितंबर को ही रहा। 21 सितंबर को बाजार में पुन: आशा का माहौल छाने से सेंसेक्स 59 हजार का बिंदु पार कर गया। 21 सितंबर से बाजार में सेंसैक्स एवं निफ्टी फिर से उड़ान भरने लगे। देशी विदेशी निवेशकों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अमेरिका दौरे से बहुत उत्साह था। 23 सितंबर को पांच अग्रणी कारपोरेट मुखिया लोगों से प्रधानमंत्री की होने वाली मुलाकातों एवं 24 सितंबर को अमेरिकी प्रेसीडेंट जोसेफ बाइडन से बहुचर्चित मुलाकात को लेकर निवेशक पहले से ही उत्साहित थे। इसलिए प्रधानमंत्री की अमेरिका की यात्रा प्रारंभ होने के दिन से ही सेंसेक्स उड़ान के कीर्तिमान स्थापित करने लगा था। अंतत: 23 सितंबर को 60,000 का बिंदु छूने की तैयारी करते हुए 24 सितंबर को 60,000 को पार करते हुए 60,333 बिंदु तक जा पहुंचा। भारतीय शेयर बाजार सदैव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से प्रभावित रहा है।