• ललित सुरजन की कलम से- भारतीय समाज : रूग्णता के लक्षण

    'हम सोचते थे कि मोदी सरकार ने आधार कार्ड की आवश्यकता स्वीकार कर भारतवासियों को एक तरह से निश्चिंत कर दिया है कि तुम्हारे पास जब यह कार्ड है

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    'हम सोचते थे कि मोदी सरकार ने आधार कार्ड की आवश्यकता स्वीकार कर भारतवासियों को एक तरह से निश्चिंत कर दिया है कि तुम्हारे पास जब यह कार्ड है तो फिर और किसी अन्य तरह के पहचानपत्र की जरूरत नहीं है कि तुम भारतवासी हो या नहीं।

    लेकिन संघ और भाजपा के नेता जिस तरह के वक्तव्य शृंखलाबद्ध तरीके से और रोजाना किश्तों में दे रहे हैं उससे लगता है कि अपने भारतीय होने का पहचानपत्र देने के लिए हर हिन्दुस्तानी को अब सरसंघचालक द्वारा स्थापित फ्रेंचाइजी पर जाना पड़ेगा।

    संभव है कि कल तक योग सिखाने वाले उद्योगपति रामदेव ये फ्रेंचाइजी ले लें और पतंजलि बिस्किट, नूडल्स, केश तेल, घी इत्यादि के साथ-साथ देश भर में फैली उनकी दुुकानों पर पहचानपत्र बिक्री का भी काउंटर खुल जाए। अगर कोई कमी होगी तो अपने भक्तों के बीच श्री श्री कहलाने वाले रविशंकर या गुरमत राम-रहीम की दुकानों से उनका वितरण किया जा सकेगा।'

    (देशबन्धु में 07 अप्रैल 2016 को प्रकाशित )
    https://lalitsurjan.blogspot.com/2016/04/blog-post.html

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