- डॉ. ओ.पी. जोशी
महाराष्ट्र के मुम्बई, नासिक एवं पालघर में भी झटके आते रहे। पालघर में 11 सितम्बर को सुबह के चार घंटों में आठ झटके 2.2 से 3.6 तीव्रता के आये। इसके पूर्व 29 जुलाई को भी झटके महसूस किये गये थे। नासिक में 4 सितम्बर की रात तथा 11 सितम्बर को कुछ कम तीव्रता के झटके आये। मुम्बई में 7 सितम्बर की सुबह वर्षा के साथ 3.5 तीव्रता के कुछ झटके आंके गये।
वर्ष 2020 में कोरोना की महामारी के अलावा हमारे देश को भूकम्पन (भूकम्प) की अधिकता ने भी डराया है। इस वर्ष 20 राज्यों में फरवरी एवं मार्च के दो महिनों को छोड़कर शेष महिनों में भूकम्प के झटके आते रहे। सर्वाधिक झटके जून माह में आंके गये। अप्रैल, मई एवं जून में जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, हरियाणा, गुजरात, नोएडा, आंध्रप्रदेश व पूर्वात्तर के राज्यों में 50 से अधिक झटके महसूस किये गये। इन्हीं महिनों में दिल्ली एवं 'नेशनल कैपीटल रीजन' (एनसीआर) में भी लगातार झटके आते रहे।
केवल अप्रैल में ही दिल्ली के आसपास 18 झटकों ने लोगों को डराया। केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख, हरियाणा, गुजरात, मिजोरम, महाराष्ट्र एवं मध्यप्रदेश में भूकम्पन अधिक हुआ। इस वर्ष में आये भूकम्प की तीन विशेषताएं रही। पहली, वर्ष के अलग-अलग महिनों में एक ही स्थान पर लगातार कम्पन दर्ज किये गये, जैसे लद्दाख, रोहतक, सिवनी एवं पालघाट। दूसरी, एक ही दिन में कई स्थानों पर झटके अंकित किये गये, जैसे 14, 21 एवं 23 जून, 16 जुलाई, 11 सितम्बर एवं 6 अक्टूबर। तीसरी, दो-तीन कम्पन को छोड़कर शेष सभी की तीव्रता रिएक्टर पैमाने पर पांच से कम रहने से जान-माल की ज्यादा हानि नहीं हुई।
लद्दाख में 12 जनवरी, 26 जून, 7 जुलाई, 5 सितंबर, 6 एवं 19 अक्टूबर को ज्यादातर सुबह के समय झटके आये। 12 जनवरी एवं 6 अक्टूबर को आए झटकों की तीव्रता रिएक्टर पैमाने पर पांच से कुछ अधिक रही एवं भूकम्प का केन्द्र कश्मीर के पास बताया गया।
हरियाणा के रोहतक में 8, 9, 18 एवं 27 जून तथा 29 जुलाई को 2.0 तीव्रता के आसपास के लगभग 30 झटके महसूस किये गये। हरियाणा के ही महेन्द्रगढ़ के खेड़ी गांव में 2 जुलाई को आए भूकम्प के बाद जमीन में एक छोटी दरार देखी गई थी। यह दरार बाद में बरसात के मौसम में 600 मीटर लम्बी, 4 से 6 फीट गहरी एवं 2 से 3 फीट चौड़ी हो गई। भूजल एवं भूगर्भ वैज्ञानिकों ने इसका निरीक्षण भी किया था, परंतु कोई कारण स्पष्ट नहीं हो पाया।
गुजरात में 14 जून से 7 नवम्बर तक कहीं न कहीं झटके आते रहे, परंतु कच्छ ज्यादा प्रभावित हुआ। 14 जून की रात को 5.3 तीव्रता के दो झटके 4 सेकंड तक आए। अहमदाबाद, राजकोट एवं भावनगर सहित 20 जिलों में झटके महसूस किये गये। भूकम्प का केन्द्र राजकोट से 120 कि.मी. दूर कच्छ के भरूच में 10 कि.मी. की गहराई पर बताया गया। यह केन्द्र 2001 में आए विनाशकारी भूकम्प के केन्द्र के पास ही था। 15 जून को कच्छ में 14 झटके आये जिनका केन्द्र राजकोट के उतर-पश्चिम से लगभग 80 कि.मी. दूर 13 कि.मी. की गहराई पर बताया गया। 5 जुलाई को भी कच्छ में शाम के समय पांच झटके महसूस किये गये जिनका केन्द्र भरूच से 15 कि.मी. दूर स्थित था। 16 जुलाई एवं 7 नवम्बर को भी वहीं 4.0 तीव्रता के झटके आये।
असम में 21 जून, 16 जुलाई तथा 8 अगस्त को शोणितपुर एवं करीमगंज के साथ अन्य कई स्थानों पर 3.5 से 4.1 तीव्रता के झटके आये थे। मेघालय एवं मणिपुर में भी 21 जून को कुछ स्थानों पर झटके महसूस किये गये थे।
महाराष्ट्र के मुम्बई, नासिक एवं पालघर में भी झटके आते रहे। पालघर में 11 सितम्बर को सुबह के चार घंटों में आठ झटके 2.2 से 3.6 तीव्रता के आये। इसके पूर्व 29 जुलाई को भी झटके महसूस किये गये थे। नासिक में 4 सितम्बर की रात तथा 11 सितम्बर को कुछ कम तीव्रता के झटके आये। मुम्बई में 7 सितम्बर की सुबह वर्षा के साथ 3.5 तीव्रता के कुछ झटके आंके गये।
मध्यप्रदेश का सिवनी भूकम्पन के संदर्भ में सिरमौर रहा। यहां 6 व 24 अगस्त, 3 सितम्बर, 26, 27 व 31 अक्टूबर तथा 3, 4, 9, 22 एवं 23 नवम्बर को अलग-अलग समय पर, अलग-अलग तीव्रता के झटके आते रहे। सावधानी के तहत जिलाध्यक्ष ने एक नवम्बर से आसपास की 120 खदानों में विस्फोट (ब्लास्टिंग) पर रोक लगायी थी। सिवनी के साथ 24 अगस्त को बड़वानी जिले के अंजड़ क्षेत्र के थमोरी में भी आधी रात को झटके आये थे।
5 जून को झारखंड के जमशेदपुर में कम तीव्रता के झटके आये। 16 एवं 29 जुलाई को क्रमश: हिमाचल प्रदेश तथा पंजाब के तरणतारण में 3.1 तीव्रता के झटके आंके गये। जयपुर क्षेत्र (राजस्थान) एवं ओडिशा के बेहरामपुर में 7 एवं 8 अगस्त को कम्पन्न हुआ। अंडमान-निकोबार में 7 एवं 8 सितम्बर को 4.0 तीव्रता के झटके दर्ज किये गये। अरूणाचल के तवांग तथा हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीती में 9 अक्टूबर को 2.3 तीव्रता का कम्पन्न हुआ। बंगाल के बांकुडा जिले में 8 अप्रैल को भूकम्प के हल्के झटके (4.1 तीव्रता) महसूस किये गये।
एक ही स्थान पर एक से अधिक बार आये भूकम्प के बाद यदि दिनों पर ध्यान दिया जाए तो 21 जून को पूर्वोतर के असम, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम एवं मणिपुर में 5.0 तीव्रता के झटके आये। इन भूकम्प के झटकों का केन्द्र आइजोल बताया गया। 7 जुलाई एवं 7 सितम्बर को क्रमश: असम, गुजरात, हिमाचल प्रदेश तथा मुम्बई, अंडमान-निकोबार एवं अरूणाचल प्रदेश में झटके आये। इसी प्रकार महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर एवं ओडिशा तथा उत्तराखंड में 11 सितम्बर एवं 4 दिसम्बर को कम्पन हुए। वर्ष में इतने लम्बे समय तक इतने अधिक स्थानों पर भूकम्प के झटके आना कहीं भविष्य के किसी बड़े भूकम्प के संकेत तो नहीं है? इस पर गंभीरता से सोचा जाना चाहिये। आखिर भूगर्भ-वैज्ञानिकों के अनुसार देश का आधे से अधिक भाग (54 प्रतिशत) भूकम्पनीय है।