• रूस में सत्ताविरोधी प्रदर्शन

    जारशाही के खिलाफ क्रांति ने रूस के साथ-साथ दुनिया की राजनीति को नई दिशा दी। अपने हक के लिए खड़े होने की नई हिम्मत जनता को मिली

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    जारशाही के खिलाफ क्रांति ने रूस के साथ-साथ दुनिया की राजनीति को नई दिशा दी। अपने हक के लिए खड़े होने की नई हिम्मत जनता को मिली। साम्यवाद ने जनतंत्र को मजबूती दी। दुनिया में उसके बाद अन्यायी, अत्याचारी, शोषक सत्ताकेंद्रों के विरुद्ध कई आंदोलन हुए, कुछ सफल रहे, कुछ नाकाम। हरेक आंदोलन के बाद यह भावना जोर पकड़ती गई कि सत्ता को निरंकुश होने से बचाने के लिए जनता को जागरुक होने और निडरता के साथ आवाज उठाने की जरूरत है, फिर चाहे उसकी कितनी भी बड़ी कीमत क्यों न चुकानी पड़े। आज रूस में फिर एक बार इसी भावना दर्शन हो रहे हैं।

    यह अजीब संयोग है कि इधर भारत की सड़कों पर अपने हक के लिए हजारों किसान आंदोलन कर रहे हैं, उधर हमारे परम मित्र राष्ट्र रूस में भी हजारों की तादाद में लोग सरकार के अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करने सड़क पर उतरे हैं। रूस में पिछले दो दशकों से सत्ता का केंद्र रहे ब्लादिमीर पुतिन अब अपनी निरंकुशता का खुलकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने आजीवन अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए संविधान में मनचाहे बदलाव किए हैं और गरज ये कि कोई उनका विरोध नहीं कर सकता। अपने विरोधियों को पुतिन राजनीतिक दांव-पेंचों या सत्ता के बूते मात देते आए हैं।

    लेकिन अलेक्सी नवेलनी को मात देना पुतिन के लिए सरल साबित नहीं हो रहा। बल्कि उन्हें अपनी कुर्सी के लिए चुनौती दिख रही है। गौरतलब है कि 44 बरस के अलेक्सी नवेलनी ने पहले कई बार सीधे-सीधे पुतिन की सत्ता को चुनौती दी। पिछले बार राष्ट्रपति चुनाव में नवेलनी ने पुतिन का मुकाबला करना चाहा, लेकिन चुनाव के ठीक पहले उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर उनकी दावेदारी निरस्त कर दी गई। इसके बाद भी नवेलनी शांत नहीं बैठे, तो वे पुतिन की आंखों में खटकने लगे। अभी कुछ महीने पहले नवेलनी साइबेरिया में विमान में यात्रा के दौरान बेहोश हो गए थे। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान जर्मनी की लैब में पता चला कि उन्हें बेहद खतरनाक नर्व एजेंट जहर 'नोविकोच' दिया गया था।

    अलेक्सी नवेलनी ने दावा किया था कि ब्लादिमीर पुतिन के कहने पर उन्हें जान से मारने की कोशिश की गई, हालांकि रूसी अधिकारियों ने इन आरोपों को निराधार बताया। पांच महीने तक जर्मनी में इलाज के बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर मास्को वापस आ रहे नवेलनी को लौटते ही मास्को एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया गया। बताया जा रहा है कि उनके समर्थक पहले से एक एयरपोर्ट पर इंतजार कर रहे थे, जिसे देखते हुए सरकार ने नवेलनी के विमान को दूसरे एयरपोर्ट पर भेजा और उन्हें उतरते ही गिरफ्त में ले लिया गया। रूस के इस कदम की दुनिया भर में आलोचना हुई।

    नवेलनी के समर्थकों की मांग है कि जल्द से जल्द उन्हें रिहा किया जाए। मगर रूस की सरकार ने प्रदर्शनकारियों की मांग को अनसुना कर दिया। इसके बाद रुस के कई शहरों में नवेलनी समर्थक सड़कों पर उतर आए और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। साइबेरिया में तो शून्य से पचास डिग्री नीचे तापमान होने के बावजूद नवेलनी समर्थक पीछे नहीं हटे। राजधानी मॉस्को में भी हजारों प्रदर्शनकारी सरकार के विरोध में उतरे, जिन पर पुलिस ने लाठियां भी भांजी, जवाब में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बर्फ के गोले फेंके।

    प्रदर्शनकारियों के हाथों में राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के खिलाफ पोस्टर्स हैं। 
    बताया जा रहा है कि अभी तक करीब 3500 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें नवेलनी की पत्नी यूलिया नवलनया, उनके कई निकट सहयोग, वकील और एक प्रवक्ता भी शामिल हैं। प्रदर्शनों से पहले पुतिन के भ्रष्टाचार को उजागर करने और जनता का समर्थन हासिल करने के लिए नवेलनी की टीम ने ब्लैक सी के पास बने एक आलीशान रिजॉर्ट का वीडियो जारी किया था। इनका आरोप है कि यह रिजॉर्ट पुतिन का है।

    सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है, लेकिन इस वीडियो को 6.5 करोड़ से ज्यादा लोग देख चुके हैं। गौरतलब है कि नवेलनी ब्लादिमीर पुतिन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते रहे हैं, लेकिन रूसी सरकार ने पैसों की हेराफेरी के एक मामले में अलेक्सी नवेलनी को दोषी ठहराया और उन्हें सजा भी दी गई। अब अधिकारियों का कहना है कि नवेलनी के जर्मनी जाने से उनकी सजा की शर्तों का उल्लंघन हुआ है, इसलिए उन्हें लौटते ही गिरफ्तार किया गया। जबकि नवेलनी का कहना है कि उन्हें राजनैतिक द्वेष के कारण गिरफ्तार किया गया।

    रूस में चल रहे इस घटनाक्रम से यह साफ नजर आ रहा है कि रूस एक बार फिर निरंकुश तानाशाही की ओर बढ़ चुका है, जहां सत्ताविरोध की कीमत अपनी आजादी खोकर चुकानी पड़ सकती है। नवेलनी पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप तभी सही साबित होंगे, जब इसकी निष्पक्ष जांच हो। लेकिन अभी तो निष्पक्षता जैसा कोई माहौल नजर नहीं आ रहा है। किसी जासूसी उपन्यास की पटकथा की तरह रूस में घटनाएं घट रही हैं और सुरक्षा के नाम पर सारी पर्दादारी चल रही है। यही माहौल इस वक्त दुनिया में लोकतंत्र के हिमायती कई देशों में बन चुका है और नवेलनी जैसे लोग हर जगह सत्ता की प्रताड़ना का शिकार हो रहे हैं। शोषित, पीड़ित जनता को रूस की क्रांति ने नई राह दिखाई थी अब फिर ऐसी ही किसी राह की जरूरत बेतहाशा महसूस की जा रही है। 

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