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| आलाकमान के निशाने पर राजे खेमे के तीन और विधायक |
| (09:11:13 PM) 20, Aug, 2009, Thursday |
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जयपुर। राजस्थान भाजपा में दो विधायकों के निलंबन और शिमला में जसवंत सिंह को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाए जाने के बाद यहां वसुंधरा राजे समर्थकों ने हालांकि मुंह बंद कर लिया है, लेकिन प्रतिपक्ष नेता पद के नए दावेदारी के लिए राजे खेमे ने बंद कमरे में मुहिम तेज कर दी है। राजे समर्थक खेमे के विधायकों ने हस्ताक्षर अभियान चलाया है। राजे समर्थकों ने मुख्य सचेतक राजेन्द्र राठौड़ और विधायक दल सचिव ज्ञानदेव आहुजा के निलंबन के खिलाफ भी जंग छेड़ दी है। इस बीच, प्रदेश मुख्यालय पर बीती रात कुछ लोगों ने तोडफ़ोड़ की। इस घटना को भी निलंबन कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है। दूसरी तरफ प्रदेश नेतृत्व तीन राजे समर्थक तीन और विधायकों के खिलाफ भी इस तरह की सख्त कार्रवाई करने पर विचार कर रही है। जानकार सूत्रों का कहना है कि पूर्वमंत्री रोहिताश्व शर्मा, देवीसिंह भाटी और एक अन्य विधायक के अब तक बयानों और दूसरी गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है। मंगलवार को वरिष्ठ नेताओं की बैठक में इन तीन विधायकों के खिलाफ भी सख्ती करने पर सहमति बन गई थी। लेकिन संघ लॉबी के नेताओं का कहना था कि एक साथ कार्रवाई करने के बजाय बारी- बारी से कदम उठाया जाए ताकि नए नेता के चयन तक वसुंधरा समर्थक अलग-थलग हो जाएं। सूत्रों ने बताया कि प्रदेशाध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने यहां की जा रही कार्रवाई के लिए पार्टी आलाकमान से भी हरी झंडी ले ली है। उधर, वसुंधरा राजे का जयपुर लौटने के बाद अपने समर्थकों के साथ चर्चा करने की खबर है। राजे समर्थकों के लिए जसवंत सिंह की पार्टी से निकासी तो खुशखबरी रही, लेकिन इससे उनकी चिंता और बढ़ गई। राजे खेमे से लौटे एक विधायक का कहना था कि जिस तरह जसवंत सिंह के खिलाफ कदम उठाया गया है, उससे प्रदेश के विरोधी खेमे में फिलहाल कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। विरोधी गुट ने इस बाबत रणनीति भी बनाई है। जानकारों के अनुसार राजे समर्थकों ने आलाकमान को एक ज्ञापन भेजने की तैयारी की है जिसमें दो विधायकों के निलम्बन और राजे से इस्तीफा मांगे जाने के तरीके के साथ ही राज्य में विधायक दल के नेता के चुनाव में विधायक दल की राय को महत्व दिए जाने की मांग की जाएगी। जसवंत सिंह के निलम्बन से वसुंधरा राजे खेमे में खुशी है। जसवंत सिंह दिल्ली दरबार में राजे के सबसे बडे विरोधी थे। जसवंत राजे के खिलाफ बीते पांच साल से मुहिम चलाए हुए थे। तब उन्होंने पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत का समर्थन हासिल था। गौरतलब है कि प्रदेशाध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने विधायक दल के सचेतक राजेन्द्र राठौड़ व सचिव ज्ञानदेव आहूजा को मंगलवार को निलंबित कर दिया। उन पर वसुंधरा राजे से केन्द्रीय नेतृत्व के इस्तीफा मांगने के निर्णय के खिलाफ दुष्प्रचार और बयानबाजी करने का आरोप है। राठौड़ व आहूजा के निलम्बन को आलाकमान की ओर से राजे समर्थकों पर वार माना जा रहा है। निलम्बन के वक्त ये दोनों विधायक राजे के घर पर ही थे। शाम को राजे के सरकारी आवास पर कल भी विधायकों का जमावड़ा रहा। सूत्रों के मुताबिक, अब तक दो दर्जन से ज्यादा विधायकों ने हस्ताक्षर अभियान के में हस्ताक्षर किए हैं। इस बीच देर रात पार्टी मुख्यालय के बाहर कुछ लोगों ने तोड़-फोड़ कर दी, जिसे निलम्बन प्रकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रदेशाध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि पार्टी में अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर और किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि अनुशासनहीनता करने वाले कुछ और लोगों पर भी पार्टी की नजर है।
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